नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (आप) में नेतृत्व की लड़ाई अब खुलकर सामने आ चुकी है और दोनों गुट इसे मीडिया के जरिए लड़ रहे हैं। 'आप' नेता और पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति (पीएससी) के सदस्य प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव की चिट्ठियां लीक होने के बाद प्रवक्ता संजय सिंह ने दोनों पर निशाना साधा और कहा कि कुछ लोग अरविंद केजरीवाल को राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाने के लिए मुहिम चला रहे हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में संजय सिंह ने इस बात का संकेत देने की कोशिश भी की कि 4 मार्च को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण पर गाज गिर सकती है। चर्चा है कि इन दोनों नेताओं की पीएसी से छुट्टी हो जाएगी।
योगेंद्र यादव को पार्टी का संयोजक बनाना चाहते हैं प्रशांत
पार्टी के सूत्रों का कहना है कि प्रशांत भूषण केजरीवाल के बदले योगेंद्र यादव को 'आप' का नया राष्ट्रीय संयोजक बनाना चाहते हैं। बताया जाता है कि पिछले दिनों हुई पॉलिटिकल अफेयर्स कमिटी (पीएसी) की बैठक के दौरान भी प्रशांत भूषण ने योगेंद्र यादव को संयोजक बनाए जाने का प्रस्ताव रखा था, जिसे कमिटी के अन्य सदस्यों ने सिरे से खारिज कर दिया था। पार्टी के संस्थापक सदस्य और प्रशांत भूषण के पिता शांति भूषण ने भी केजरीवाल को लेकर सवाल उठाया था और कहा था कि किसी और को संयोजक बनाया जाना चाहिए। इस बीच प्रशांत भूषण ने कहा है कि उन्होंने पत्र लिखकर पार्टी में सांगठनिक बदलाव की बात की है। इसे विद्रोह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
योगेंद्र यादव को पार्टी का संयोजक बनाना चाहते हैं प्रशांत
पार्टी के सूत्रों का कहना है कि प्रशांत भूषण केजरीवाल के बदले योगेंद्र यादव को 'आप' का नया राष्ट्रीय संयोजक बनाना चाहते हैं। बताया जाता है कि पिछले दिनों हुई पॉलिटिकल अफेयर्स कमिटी (पीएसी) की बैठक के दौरान भी प्रशांत भूषण ने योगेंद्र यादव को संयोजक बनाए जाने का प्रस्ताव रखा था, जिसे कमिटी के अन्य सदस्यों ने सिरे से खारिज कर दिया था। पार्टी के संस्थापक सदस्य और प्रशांत भूषण के पिता शांति भूषण ने भी केजरीवाल को लेकर सवाल उठाया था और कहा था कि किसी और को संयोजक बनाया जाना चाहिए। इस बीच प्रशांत भूषण ने कहा है कि उन्होंने पत्र लिखकर पार्टी में सांगठनिक बदलाव की बात की है। इसे विद्रोह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
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नई दिल्ली. भूमि अधिग्रहण के खिलाफ धरना-प्रदर्शन कर रहे अन्ना हजारे के साथ लंबे समय बाद अरविंद केजरीवाल नजर आए। मंगलवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री जैसे-तैसे मंच तक पहुंच तो गए, लेकिन वहां विरोध के कारण उन्हें कुछ देर बाद ही उतरना पड़ा। इससे पहले अरविंद केजरीवाल अन्ना हजारे के मंच के नजदीक पहुंचे। केजरीवाल मंच के ठीक सामने अगली पंक्ति में जाकर बैठ गए। कुछ देर बाद ही केजरीवाल उठे और जैसे ही मंच की ओर बढ़े, वहां मौजूद लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। विरोध के बाद केजरीवाल मंच के नीचे ही रुकने को मजबूर हो गए और वहीं खड़े हो गए। इसी दौरान लगभग छह फुट ऊंचे मंच से कुछ लोगों ने केजरीवाल को ऊपर खींच लिया। इसके बाद केजरीवाल कुछ देर तक अन्ना हजारे के साथ बगल में बैठे रहे। लेकिन बाद में उन्हें वहां से उतरना पड़ा।
भूमि अधिग्रहण बिल मंगलवार को संसद में पेश किया जा रहा है. भूमि अधिग्रहण बिल को लेकर सोमवार से ही समाजसेवी अन्ना हजारे दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दे रहे हैं. मंगलवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी अन्ना के साथ जंतर-मंतर पर धरना देने पहुंचे.
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मोदी सरकार प्रॉपर्टी डीलर की तरह व्यवहार कर रही है. इस देश में जो भी सरकार गरीबों के खिलाफ कानून बनाएगी, जनता सबक सिखाएगी. अन्ना के आंदोलन का समर्थन करते हुए केजरीवाल ने कहा कि हम अन्ना के आंदोलन का समर्थन करते हैं. दिल्ली में जमीन का मुद्द केंद्र के अंदर है, लेकिन दिल्ली सरकार की जितनी भी ताकत होगी. किसी की भी जमीन जबरदस्ती अधिग्रहण नहीं की जाएगी.
केजरीवाल ने कहा कि अगर विकास करना चाहते हैं. अस्पताल, स्कूल, मेट्रो लाना चाहते हैं, जनता खुशी-खुशी जमीन देती है. दिल्ली की जनता के बीच गया तो लोगों ने कहा स्कूल चाहिए, कॉलेज चाहिए. जमीन के लिए पूछा तो बोले जमीन हम देंगे.जब भी जनता की मर्जी से जमीन ली जाएगी, मार्केट देख कर मुआवजा दिया जाएगा. यह पूरा कानून धोखा है. मैंने अन्ना को हमेशा गुरु और पिता माना है. हम आपके साथ हैं, आखिरी तन मन तक समर्थन करते हैं.
अन्ना को सचिवालय में आने का निमंत्रण देते हुए केजरीवाल ने कहा कि अन्ना बुधवार को दस मिनट के लिए सचिवालय में चरण रखेंगे तो सचिवालय शुद्ध हो जाएगा. अन्ना के आने से हमें प्रेरणा मिलेगी. अन्ना हजारे ने कहा कि मोदी सरकार का दिमाग जगह पर लाने के लिए ये धरना जरूरी है. चार महीने फिर से ये करना है. जेल भरो आंदोलन चलाना होगा. जेल में नाश्ता खाना मिलता है तो क्या हर्ज है. लोकतंत्र कहां है, सिर्फ गोरे गए और काले लोग आ गए. शरीर में जब तक प्राण हैं, तब तक मैं लड़ता रहूंगा. जिस दिन मैं मरूंगा, समाज की सेवा करता हुआ मरूंगा.
अन्ना हजारे ने संसद मार्ग में विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों से मुलाकात की. अन्ना हजारे ने कहा कि ये बिल किसानों के पक्ष में नहीं है. सब इसी देश के हैं. सब मिलकर अन्याय दूर करने की कोशिश करें तो क्या दिक्कत है. केजरीवाल को स्टेज शेयर नहीं करने देंगे. पब्लिक में आएं तो ठीक है. पक्ष और पार्टी को स्टेज नहीं देंगे. सीएम के पद का सम्मान रखेंगे.
इससे पहले अन्ना हजारे सोमवार को कह चुके हैं कि इस बिल के आ जाने से किसानों से उनकी जमीन छीन ली जाएगी. ऐसे में सरकार और अंग्रेजों में क्या फर्क रह गया. सोमवार को अरविंद केजरीवाल के साथ दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने अन्ना से मुलाकात की थी. अन्ना से मुलाकात के बाद मनीष सिसोदिया ने बताया कि मंगलवार को अरविंद केजरीवाल जंतर-मंतर पर अन्ना के साथ मंच साझा करेंगे और अन्ना के साथ थोड़ी देर धरने पर भी बैठेंगे. सिसोदिया ने कहा, 'अन्ना पिता के समान हैं और भूमि अधिग्रहण के खिलाफ लड़ाई में आम आदमी पार्टी उनके साथ खड़ी है.'
गौरतलब है कि पिछले साल दिसंबर में सरकार भूमि कानून में बदलाव करते हुए अध्यादेश लेकर आई थी. इन बदलावों में पांच क्षेत्रों-औद्योगिक कॉरिडोर, पीपीपी प्रोजेक्ट्स, ग्रामीण अवसंरचना, किफायती आवास और रक्षा के लिए सहमति की शर्त को भी हटा दिया गया था.
नई दिल्ली : किसानों के प्रति मोदी सरकार पर उपेक्षा का भाव अपनाने के आरोप लगाते हुए सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने संसद का बजट सत्र शुरू होने के साथ ही आज यहां विवादास्पद भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के खिलाफ दो दिवसीय आंदोलन की शुरूआत की ।
77 वर्षीय हजारे के साथ सैकड़ों कार्यकर्ताओं और नर्मदा बचाओ आंदोलन की कायकर्ता मेधा पाटकर भी जंतर-मंतर पर उनके साथ शामिल हुईं । अन्ना ने कहा कि वह अध्यादेश के खिलाफ देश के हर जिले में आंदोलन को ले जाएंगे । हजारे ने कहा कि प्रदर्शन स्थल पर वह आप या कांग्रेस के साथ मंच साझा नहीं करेंगे और दोनों दल आम आदमी के रूप में प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं ।
हजारे ने कहा, ‘आप किसानों की सहमति के बगैर उनकी जमीन कैसे ले सकते हैं । भारत कृषि प्रधान देश है । सरकार को किसानों के बारे में सोचना चाहिए । भूमि अध्यादेश अलोकतांत्रिक है ।’ उन्होंने कहा, ‘सरकार किसानों के हितों की उपेक्षा नहीं कर सकती । यह भारत के लोगों की सरकार है न कि इंग्लैंड या अमेरिका की । लोगों ने सरकार बनाई है।’ इसे काफी गंभीर मुद्दा करार देते हुए हजारे ने कहा कि अगर सरकार ने किसानों की मांग पर ध्यान नहीं दिया तो वह पूरे देश में आंदोलन करेंगे और फिर तुरंत रामलीला मैदान लौटेंगे ।
हजारे ने कहा, ‘गांवों के लोगों को इस बारे में (संशोधन) अब भी पता नहीं है । अब हम हर राज्य एवं हर जिले के लोगों को प्रावधानों (अध्यादेश के) से अवगत कराएंगे । हर जिले में जाना जरूरी है ।’ हजारे अध्यादेश के माध्यम से भूमि अधिग्रहण कानून में कुछ बदलाव किए जाने को लेकर मोदी सरकार के घोर आलोचक रहे हैं ।
पिछले वर्ष 29 दिसम्बर को सरकार ने अध्यादेश लाकर भूमि अधिग्रहण कानून में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए थे जिसमें भूमि अधिग्रहण के लिए पांच क्षेत्रों में किसानों की सहमति प्राप्त करने की धारा को हटाना भी शामिल है । ये पांच क्षेत्र हैं औद्योगिक कोरीडोर, पीपीपी परियोजनाएं, ग्रामीण आधारभूत ढांचे, सस्ते आवास और रक्षा ।
यह पूछने पर कि क्या आप और कांग्रेस आंदोलन में शामिल हो सकते हैं तो हजारे ने कहा, ‘उन्हें मंच साझा करने की अनुमति नहीं होगी क्योंकि अगर मैंने अनुमति दी तो यह पार्टी का कार्यक्रम बन जाएगा । वे लोगों के साथ शामिल हो सकते हैं । उन्हें कोई नहीं रोक सकता ।’’ यह पूछने पर कि क्या वह प्रदर्शन में कभी साथी रहे अरविंद केजरीवाल और किरण बेदी को याद करेंगे तो उन्होंने कहा, ‘हम उन्हें क्यों याद करें । हमारा कोई निजी हित या मंशा नहीं है । अगर कोई निजी मंशा या हित होती उन्हें याद किया जाता । ये लोगों के मुद्दे हैं ।’’ भूमि अध्यादेश पर केंद्र की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए ।
उन्होंने कहा, ‘‘स्वतंत्रता के बाद पहली बार किसानों को वर्तमान सरकार के समय में भूमि अधिग्रहण अध्यादेश लाए जाने के बाद इतने अन्याय का सामना करना पड़ रहा है ।
हजारे ने कहा, ‘2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के मुताबिक जब तक जमीन अधिग्रहित किए जाने वाले गांव के 70 फीसदी किसान सहमति नहीं देते तब तक जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जा सकता । लेकिन इस सरकार ने इस प्रावधान को हटा दिया। यह कारपोरेट के फायदे के लिए किया गया ।’ उन्होंने कहा, ‘चुनावों से पहले लोगों को ‘अच्छे दिन’ के वादे किए गए, उन्होंने विश्वास किया और उन्हें वोट दिया । आज वे किसानों से जबरन उनकी जमीन छीन रहे हैं । इसलिए ‘अच्छे दिन’ कारपोरेट के लिए हैं न कि आम आदमी के लिए ।’ हजारे ने कहा कि देश के जिले एवं प्रखंड स्तर पर तीन-चार महीने की पदयात्रा के बाद यहां के रामलीला मैदान से ‘जेल भरो’ आंदोलन की शुरूआत की जाएगी।
लोगों को संबोधित करते हुए पाटकर ने कहा, ‘हमें विकास के लिए रालेगण सिद्धि मॉडल की जरूरत है न कि गुजरात मॉडल की जहां सौराष्ट्र प्यासा रह गया है।’
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दिल्ली: देश व प्रदेश में एतिहासिक जीत के बाद दिल्ली में भाजपा को मिली करारी शिकस्त के बाद भाजपाइयों में निराशा देखी गई जबकि आम आदमी पार्टी ने जमकर जश्न मनाया। सुबह से ही हर आम खास की निगाह चुनावी नतीजों पर टिकी हुई थी। लोग टीवी से चिपके रहे। चुनावी नतीजे अपने पक्ष में आते देख आप ने पहले से ही जश्न की तैयारी शुरू की हुई थी। आप को मिली ऐतिहासिक जीत के चर्चे गलियारों से लेकर सरकारी कार्यालयों तक सुने गए। हर किसी की जुबां पर एक ही बात थी कि वाकई दिल्ली में केजरीवाल ने कमाल कर दिया।
पार्टी कार्यालय में पार्टी कार्यकर्ता लक्षमण विनायक के नेतृत्व में जीत का जश्न मनाया गया। लक्षमण विनायक ने कहा कि दिल्ली में आप की जीत आम आदमी की जीत है। दिल्ली में केजरीवाल आम आदमी की आवाज बने। उन्होंने कहा कि पार्टी का अगला लक्ष्य पंजाब राज्य में होने वाले चुनावों में जीत दर्ज करना है।
मौके पर अमरपाल आर्य, अजय शर्मा, नरेश कुमार, प्रिया, संजीव गुप्ता, सुभाष, इंद्रजीत आदि उपस्थित थे। चुनाव में आम आदमी पार्टी की रिकार्ड तोड़ जीत पर साढौरा में आप कार्यकर्ताओं ने ढोल बजाकर खुशी का इजहार किया तथा मिठाई बांटी। वही, भाजपा एवं काग्रेस खेमा पूरी तरह से मायूस नजर आया। चुनावी परिणाम आने से पूर्व ही आप कार्यकर्ताओं ने चुनावी जीत का जश्न मनाने की तैयारी कर रखी थी। आप पार्टी ने जैसे जी पूर्ण बहुमत का आंकड़ा प्राप्त किया आप कार्यकर्ता मुख्य बाजार में निकल आए तथा लोगों को मिठाई बांटी। आप संयोजक अरुण जैन ने दिल्ली विधान सभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की जीत को आम आदमी की जीत बताते हुए कहा कि यह देश में पहला मौका है जब लोगों ने अपने लिए वोट दिया।
उन्होंने कहा कि केजरीवाल के मुकाबले में पूरा यूपीए सभी सांसद, विधायक, भाजपा शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री एवं पूरी नौकरशाही सामने थी, लेकिन फिर भी जनता ने आम आदमी को ही वोट देना बेहतर समझा तथा प्रदेश को एक ईमानदार एवं मेहनती मुख्यमंत्री दिया। पार्टी कार्यकर्ता शमशेर राणा,राजा राम एवं कर्मवीर ने कहा कि अब दिल्ली वासियों को साफ सुथरा प्रशासन मिलेगा। उन्होने कहा कि केवल केजरीवाल ने ही प्रधानमंत्री के विजयी रथ को रोका है। इस चुनाव का देश की राजनीति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। केजरीवाल के रूप में देश को एक ईमानदार तथा जुझारू नेता मिल चुका है। अब देश की जनता को भी विश्वास हो गया है केजरीवाल सही नीतियों वाला नेता है। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों के विधान सभा चुनावों में आप पार्टी को भारी समर्थन अवश्य मिलेगा
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दिल्ली: धार्मिक गुरुओं की दिल्ली की राजनीति पर बयानबाजी जारी है। डेरा सच्चा सौदा के गुरमीत राम रहीम की बीजेपी को वोट देने की अपील करने के बाद जामा मस्जिद के इमाम अहमद बुखारी ने आम आदमी पार्टी को वोट देने की अपील की है।
चुनावों से एक दिन पहले दिल्ली की सियासत को और गर्माते हुए बुखारी ने आम आदमी पार्टी को समर्थन की बात कही है। लेकिन, पार्टी ने बुखारी से किसी भी प्रकार का समर्थन लेने से इंकार कर दिया है। पार्टी के नेता संजय सिंह ने कहा कि हम ऐसे शख्स का समर्थन नहीं ले सकते जिसने अपने बेटे की दस्तारबंदी में भारत के प्रधानमंत्री को न बुलाकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को बुलाता है।
इससे पहले, बुखारी ने दिल्ली के वोटरों खासकर मुसलमानों से आप को वोट देने की अपील की थी। बुखारी ने कहा था कि देश की गंगा- जमुनी तहज़ीब को बचाने के लिए आप के उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करनी चाहिये।
आम आदमी पार्टी के पक्ष में वोट की अपील करते हुए बुखारी ने कहा कि हमने इस चुनाव में सेकुलर दल की हिमायत करने का फेसला किया है। और इसलिए उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि वे आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों के हक में वोट करें। हालांकि आप ने बुखारी के इस समर्थन से इंकार कर दिया है। पार्टी ने कहा है कि हम धर्म की राजनीति नहीं करते हैं।
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नई दिल्ली: इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) से छेड़छाड़ का आरोप लगाने के बाद बुधवार को चुनाव आयोग पहुंचे अरविंद केजरीवाल से कहा गया कि वह वोटिंग मशीनों में गड़बड़ी के प्रमाण और डीटेल्स दें। चुनाव आयोग बिना किसी सबूत के ईवीएम में बीजेपी के पक्ष में छेड़छाड़ के आरोप से खुश नहीं है और उसने मुलाकात के दौरान केजरीवाल के आरोपों को खारिज करते हुए सबूत देने के लिए कह दिया।
न्यूज़ चैनल एनडटीवी के मुताबिक, आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक केजरीवाल से आयोग ने कहा कि उन्हें वोटिंग मशीनों से छेड़छाड़ के सूबत देने चाहिए। इसके साथ ही उन्हें सूचना दी गई कि सारी ईवीएम लेटेस्ट हैं और उनसे छेड़छाड़ संभव ही नहीं है।
इससे पहले अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उनकी पार्टी पोलिंग बूथों के बाहर वोटरों को जागरूक करने वाले बैनर लगाना चाहती है। उन्होंने इस बारे में ट्विटर पर कहा, 'हम चुनाव आयोग से बूथों के बाहर हमें बैनर लगाने की अनुमति देने का आग्रह करते हैं, जिससे कि ईवीएम के बारे में वोटरों को शिक्षित किया जा सके।'
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नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार को यहां के द्वारका इलाके में चुनावी रैली की। आप और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मोदी ने कहा, '' दोनों सुबह उठकर तय करते हैं कि आज कौन-सा झूठ बोलें, ताकि सनसनी मचे। झूठे वादे करने और झूठ बोलने की प्रतिस्पर्धा हो रही है। इस चुनाव में झूठ का जितना सहारा लिया जा रहा है, उतना कभी नहीं हुआ। टीवी में जगह बनाने के लिए सरकार नहीं चलानी होती, सरकार चलानी होती है लोगों के दिलों में जगह बनाने के लिए।''
मोदी ने यह भी कहा, ''आपने जो दिया है, विकास करके लौटाना है। यहां की समस्या को दूर करने लौटाना है। इसलिए मुझे आप सेवा करने का मौका दिया। दिल्ली को संवेदनशील सरकार की जरूरत है। दिल्ली में यहां की धरती से जुड़े लोगों की जरूरत हैं। ऐसे लोगों की जरूरतें हैं, जिन्होंने दिल्ली के सामान्य लोगों की सेवा में जिंदगी बिताई है।'' मोदी ने जनता से पूर्ण बहुमत वाली बीजेपी सरकार बनाने की अपील करते हुए कहा, '' इस बार गलती से भी आधा-अधूरा मत करना। दिल्ली का एक साल बिगड़ गया। दिल्ली पच्चीस साल पिछड़ गया। दिल्ली को आगे बढ़ाना है तो पूर्ण बहुमत वाली बीजेपी सरकार लानी होगी।'' मोदी ने दिल्ली में गरीबों को झुग्गियों की जगह पक्के मकान देने और पानी, बिजली और शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी करने का भी वादा किया।
पेट्रोल-डीजल की कम होती कीमतों का श्रेय लिया
मोदी ने पेट्रोल-डीजल की कम होती कीमतों का श्रेय भी लिया और विरोधियों पर निशाना भी साधा। मोदी ने कहा, ''मेरी आलोचना करने वाले कहते हैं कि यह मोदी का नसीब है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम हो रही हैं। मैं कहता हूं कि अगर नसीब से पैसा बचता है तो बदनसीब की क्या जरूरत है? मेरे नसीब से पेट्रोल और डीजल सस्ता हुआ है तो हर्जा क्या है?'' बता दें कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की गिरती कीमतों की वजह से पेट्रोल और डीजल की कीमत में आई कमी का बीजेपी और मोदी द्वारा श्रेय लेने की वजह से विपक्षी पार्टियां निशाना साधती रही हैं। मोदी ने कहा कि लोगों ने उनकी यह कहकर आलोचना की कि उन्हें विदेश नीति की समझ नहीं है। मोदी बोले, ''ये मैं भली-भांति जानता हूं कि विश्व में भारत का लोहा कैसे मनवाया जाए, क्योंकि मैं अपने देश को जानता हूं।'' मोदी ने यह भी कहा, ''मैंने विकास के एजेंडे पर चुनाव लड़ा है, मैं सरकार भी इसी एजेंडे पर चलाता हूं। सभी समस्याओं का विकास ही इलाज है।''
पानी की समस्या दूर हुई: मोदी
मोदी ने कहा, ''मैं असली द्वारका वाला हूं, पर अब असली दिल्लीवासी हो गया हूं। आपको याद होगा कि पिछले चुनाव में मैं यहां आया था और उस समय मैंने आपकी पानी की समस्या का जिक्र किया था। सामान्य तौर पर, राजनीतिज्ञों द्वारा वादे करना और वादे भुला देने की एक परंपरा बन गई है। लेकिन आपको याद दिलाता हूं कि मैंने यहीं द्वारका में आपसे पानी की समस्या की चर्चा की थी। आपने जैसे ही हमने सेवा का मौका दिया और हरियाणा में बीजेपी की सरकार बनी तो आपकी पानी की समस्या को खत्म किया। एक समय था, जब दिल्ली और हरियाणा में कांग्रेस की सरकार थी। हरियाणा की सरकार किसानों को और दिल्ली की सरकार यहां की जनता को पानी के मुद्दे पर एक-दूसरे के खिलाफ भड़काती थी। इस तरह की राजनीति कांग्रेस करती रही है।'' मोदी ने यह भी कहा कि इतने सालों में देश में गरीबी इसलिए नहीं मिटी, क्योंकि देश की गरीबी में ही राजनीति की सलामती है। इन लोगों को आपके जीवन की सलामती की चिंता नहीं है।
कल भी साधा था आप और कांग्रेस पर निशाना
इससे पहले, मोदी शनिवार को पूर्वी दिल्ली के कड़कड़डूमा में हुई रैली को संबोधित करने पहुंचे थे। यहां मोदी ने आम आदमी पार्टी और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा था। पीएम मोदी ने आम आदमी पार्टी का नाम लिए बिना कहा कि मुफ्त चीजों का वादा करने वालों और झूठ बोलने वालों से बचें। बता दें कि दिल्ली विधानसभा चुनावों के लिए पीएम मोदी की चार रैलियां प्रस्तावित हैं। द्वारका में मोदी की यह दूसरी रैली है। इस रैली के लिए सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त किए गए थे।
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नई दिल्ली
दिल्ली में रविवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कांग्रेस के चुनाव अभियान को तेज करते हुए बदरपुर रैली में पीएम मोदी और आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल पर जमकर हमला बोला। सोनिया ने मोदी को जहां उनके चुनावी वादे याद दिलाए, वहीं आप और केजरीवाल पर 'धरना वाली पार्टी' और 'जिम्मेदारी से भागने वाले' कहकर कटाक्ष किया।
मोदी पर निशानाः सोनिया ने मोदी के लोकसभा में किए गए चुनावी वादों को खोखला बताया। उन्होंने मोदी से सवाल करते हुए कहा, 'कहां हैं वह काला धन जिससे हर नागरिक को 15-15 लाख रुपये दिए जाने थे, कहां है वह रोजगार जो हर युवक को मिलना था, कहां हैं वे कदम जिनसे महंगाई कम होनी थी?
उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार ने जनता के हित में कई क्रांतिकारी कानून बनाए थे। फूड सिक्यॉरिटी बिल इसमें से एक था। लेकिन मोदी सरकार अब इस कानून में ऐसा बदलाव लाने की तैयारी में है, जिससे कई लोग इससे वंचित हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि आज किसानों को उपज की सही कीमत नहीं मिल रही, साथ ही ऑर्डिनेंस के जरिए किसी की भी जमीन अधिग्रहीत करने का रास्ता खोल दिया गया है।'
केजरीवाल पर कटाक्ष: सोनिया ने रैली में केजरीवाल पर कुर्सी छोड़कर भागने वाला कहकर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस पार्टी ने अच्छे शासन के लिए समर्थन दिया था, लेकिन नतीजा कुछ और निकला। जिनको हमने समर्थन दिया, वे डेढ़ महीने भी सरकार नहीं चला पाए, जिम्मेदारी छोड़कर चले गए।' उन्होंने आम आदमी पार्टी पर दिखावे की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस धरनावाली पार्टी से सतर्क रखने की जरूरत है। देश नारों से नहीं चलता, भावना से आगे बढ़ता है।
मनमोहन, शीला की तारीफः सोनिया ने अपने भाषण में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित के कार्यकाल की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि दिल्ली में 15 साल के दौरान कांग्रेस ने चौड़ी सड़कें, फ्लाईओवर, मेट्रो की सुविधा, सीएनजी, 24 घंटे बिजली, हजारों किलोमीटर लंबी पाइपलाइनें और झुग्गीवालों को पक्के मकान दिए। वहीं मनमोहन सरकार में कई ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम उठाए गए थे।
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नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास ने एक रैली में बीजेपी की सीएम कैंडिडेट किरन बेदी के खिलाफ अश्लील टिप्पणी के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने बीजेपी को चुनौती देते हुए कहा कि अगर वह उनके खिलाफ आरोप साबित कर दे, तो वह राजनीति छोड़ देंगे। बीजेपी ने विश्वास की टिप्पणी को अश्लील बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
इस पूरे विवाद पर कुमार विश्वास ने कहा कि उनकी स्पीच को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिकायत करने वालों को उनके भाषण को ठीक से सुनना चाहिए। भाषण में कहीं भी उन्होंने किरन बेदी का नाम नहीं लिया था।
विश्वास ने कहा, 'आज सभी रैलियों की रिकॉर्डिंग होती है। मुंडका की उस रैली में भी 19 कैमरे थे। चुनाव आयोग का भी कैमरा था। मैंने कहीं भी किरन बेदी के खिलाफ कोई कॉमेंट किया हो तो मैं किरन बेदी को चैलेंज करता हूं... पूरी रैली में मैंने उनके नाम के साथ कोई कॉमेंट नहीं किया है।'
विश्वास ने कहा कि अगर कोई भी साबित कर दे कि किरन बेदी के खिलाफ मैंने कोई कॉमेंट किया है तो या तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा या बेदी राजनीति छोड़ दें। बीजेपी पर हमला बोलते हुए विश्वास ने कहा कि किरन बेदी जी अगर मेरे खिलाफ एफआईआर करवाने गई हैं, तो उन्हें मोदी के रेप के आरोपी मंत्री के खिलाफ भी कार्रवाई करवानी चाहिए।
विश्वास के भाषण का वह अंश जिस पर हो रहा है विवाद
'पिछले तीन साल से भाजपाई अरविंद केजरीवाल में कमियां खोज रहे हैं। दो कमियां मिलीं इन भाजपाइयों को। अरविंद केजरीवाल के दो अपराध हैं, एक तो मफलर पहनता है...भाई तेरा छीन लिया क्या। दूसरा, भाजपाई कहते हैं कि खांसता बहुत है, मैंने कहा तुझे इसके बेडरूम में सोना है। भई, खांसता है तो इसके घर वालों को समस्या होगी। दवाइयों की समस्या होगी। ये दो समस्याएं खोज कर लाए हैं भाजपाई।'
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नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के खिलाफ बीजेपी के विज्ञापनों पर केजरीवाल ने तीखा हमला किया है। केजरीवाल ने ट्वीट किया है कि नाथूराम ने गांधी को मारा था और बीजेपी ने अन्ना को मार दिया।
बीजेपी ने शुक्रवार को कई अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापन देकर आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल का मजाक उड़ाया है। इन विज्ञापनों में अन्ना की तस्वीर भी इस्तेमाल हुई है जिस पर माला चढ़ी हुई है। केजरीवाल का इशारा इसी माला की ओर है।
उन्होंने लिखा है, '1948 में इसी दिन नाथूराम गोडसे ने गांधीजी की हत्या की थी। BJP ने आज अपने विज्ञापन में अन्ना की हत्या कर दी। क्या बीजेपी को माफी नहीं मांगनी चाहिए?'
बीजेपी के कार्टूननुमा विज्ञापन में आम आदमी पार्टी को पति और कांग्रेस को पत्नी दिखाया है और लिखा है सत्ता के लिए बच्चों की झूठी कसम तक मैं खाऊंगा और रात दिन ईमानदारी का डंका भी बजाऊंगा।
टीम अन्ना में मतभेद दिन ब दिन उजागर हो रहे है किरण बेदी, शाजिया इल्मी के बाद टीम अन्ना में मुख्य सदस्य रहे शांति भूषण ने भी अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा है आम आदमी पार्टी के संस्थापक रहे शांति भूषण ने कल सीएम पद के लिए किरण बेदी को पहला स्थान देकर केजरीवाल को तीसरे नम्बर का सीएम बताया था तो वहीं आज उन्होने एक और हमला बोलते हुए कहा अरविंद केजरीवाल सत्ता के भूखे हो गए हैं एक न्यूज चैनल से बातचीत में शांति भूषण ने कहा कि केजरीवाल रास्ते से भटक गए हैं।
उन्होंने कहा, 'हमने पार्टी इसलिए बनाई थी कि बीजेपी में भी दोष है वे कम्यूनल हो जाते हैं। लेकिन ऐसा लगता है कि केजरीवाल ने जो कैंडिडेट्स चुने हैं उनमें दूसरी पार्टियों को छोड़कर आए लोग भी हैं। उनको भी टिकट दे दिया। पार्टी बने भी दो साल हो गए, इतने सारे लोग जुड़े लेकिन उन्हें छोड़कर दूसरी पार्टियों से आए टिकट दिए गए। सिर्फ जीतने के लिए।'
शांति भूषण ने कहा कि आम आदमी पार्टी बस केजरीवाल की बनकर रह गई है और उन्हें बदलने का वक्त आ गया है। शांति भूषण ने कहा कि पार्टी के बारे में सारे फैसले नैशनल काउंसिल करती है और अब केजरीवाल को बदलने का वक्त आ गया है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल के बिना आम आदमी पार्टी नहीं रहेगी, ऐसा सोचना गलता है।
शांति भूषण ने कहा, 'केजरीवाल सत्ता के भूखे हो गए हैं। पिछली बार चीफ मिनिस्टर बन गए तो उन्हें लगता है वह फिर से बस दिल्ली के मुख्यमंत्री बन जाएं। उन्होंने पूरे देश में चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया जबकि उन्हें स्टेट्स में चुनाव लड़ना चाहिए था। राष्ट्रपति शासन के दौरान भी उन्होंने कांग्रेस से मिलकर सरकार बनाने की कोशिश की थी।'
शांति भूषण ने दावा किया कि उनके बेटे और पार्टी की पॉलिटिकल अफेयर्स कमिटी के मेंबर प्रशांत भूषण भी उनकी इस राय से सहमत हैं कि केजरीवाल रास्ते से भटक गए हैं।
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नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में चुनावी बिगुल बज गया है। चुनाव आयोग ने दिल्ली में चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। दिल्ली की 70 सीटों के लिए 7 फरवरी को वोट डाले जाएंगे और वोटों की गिनती 10 फरवरी को होगी। दिल्ली में इस बार मुकाबला बीजेपी, एएपी और कांग्रेस के बीच है।
मुख्य चुनाव आयुक्त वी एस संपत के ऐलान के साथ ही दिल्ली में चुनावी लड़ाई का शंखनाद हो गया। करीब एक साल तक बगैर सरकार के रही दिल्ली एक बार फिर नई सरकार चुनने के लिए तैयार है। पिछली बार की तरह इस बार भी मुकाबला बीजेपी, एएपी और कांग्रेस के बीच है। चुनाव आयोग के मुताबिक पूरी चुनावी प्रक्रिया 15 फरवरी के पहले पूरी कर ली जाएगी।
7 फरवरी को दिल्ली की 70 सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे। 10 फरवरी को वोटों की गिनती होगी और नतीजे आएंगे। 21 जनवरी को नामांकन की आखिरी तारीख है। नाम वापस लेने की अंतिम तारीख 24 जनवरी है।
चुनाव की तारीखों का ऐलान होने के साथ ही दिल्ली में आचार संहिता लागू हो गई है। चुनाव खर्च पर नजर रखने के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है। एक जनवरी 2015 तक 18 साल के हो चुके युवा भी इस बार अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे बशर्ते कि उनका नाम वोटर लिस्ट में हो।
दिल्ली के एक करोड़ 30 लाख मतदाता अपने अधिकार का इस्तेमाल करेंगे। मतदान के लिए 11,763 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। मतदाताओं के पास NOTA यानी किसी को भी नहीं चुनने का भी अधिकार होगा। दिल्ली की 70 में 12 सीटें आरक्षित हैं।
चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही सभी सियासी दलों ने कमर कस ली है। दिसंबर 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला था। बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी थी, जबकि एएपी दूसरे नंबर पर थी। पिछली बार बीजेपी को 32, एएपी को 28, कांग्रेस को 8 और अन्य को 2 सीटें मिली थीं।
इस बार भी बीजेपी और एएपी में टक्कर की उम्मीद है। लेकिन बीते एक साल में देश का सियासी माहौल तेजी से बदला है। केंद्र में बीजेपी की बहुमत वाली सरकार है और पीएम मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने चार राज्यों में शानदार जीत हासिल की है।
आम आदमी पार्टी ने ने सभी 70 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है। वहीं बीजेपी ने अब तक अपना एक भी उम्मीदवार तय नहीं किया है। कांग्रेस ने भी 24 उम्मीदवारों के नाम ऐलान कर दिया है। रेडियो पर BJP बनाम AAP का मुकाबला जोर-शोर से चल रहा है। BJP ने मोदी की बड़ी रैली कर चुनावी बिगुल फूंका। रैली में मोदी ने दिल्ली से किए कई वादे। पीएम मोदी ने किया 24 घंटे बिजली का वादा। 2022 तक सभी झुग्गी बस्तियों को पक्के मकान में बदलने का भी वादा किया है।
दिल्ली के एक करोड़ 30 लाख मतदाता अपने अधिकार का इस्तेमाल करेंगे। मतदान के लिए 11,763 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। मतदाताओं के पास NOTA यानी किसी को भी नहीं चुनने का भी अधिकार होगा। दिल्ली की 70 में 12 सीटें आरक्षित हैं।
चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही सभी सियासी दलों ने कमर कस ली है। दिसंबर 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला था। बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी थी, जबकि एएपी दूसरे नंबर पर थी। पिछली बार बीजेपी को 32, एएपी को 28, कांग्रेस को 8 और अन्य को 2 सीटें मिली थीं।
इस बार भी बीजेपी और एएपी में टक्कर की उम्मीद है। लेकिन बीते एक साल में देश का सियासी माहौल तेजी से बदला है। केंद्र में बीजेपी की बहुमत वाली सरकार है और पीएम मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने चार राज्यों में शानदार जीत हासिल की है।
आम आदमी पार्टी ने ने सभी 70 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है। वहीं बीजेपी ने अब तक अपना एक भी उम्मीदवार तय नहीं किया है। कांग्रेस ने भी 24 उम्मीदवारों के नाम ऐलान कर दिया है। रेडियो पर BJP बनाम AAP का मुकाबला जोर-शोर से चल रहा है। BJP ने मोदी की बड़ी रैली कर चुनावी बिगुल फूंका। रैली में मोदी ने दिल्ली से किए कई वादे। पीएम मोदी ने किया 24 घंटे बिजली का वादा। 2022 तक सभी झुग्गी बस्तियों को पक्के मकान में बदलने का भी वादा किया है।
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नई दिल्ली: अरविंद केजरीवाल से उनके अनिश्चितकालीन उपवास में शामिल होने के लिए न्यौता मिलने के कई दिन बाद गुरुवार को अन्ना हजारे ने कहा कि वह प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लेंगे क्योंकि उनका दलगत राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है।
जालियांवाला बाग से 31 मार्च से अपनी राष्ट्रव्यापी यात्रा शुरू करने की घोषणा करने के लिए यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस सप्ताह के शुरू में केजरीवाल उनके पास आए थे और उपवास से पहले उनका आशीर्वाद मांगा था तथा आने का न्यौता दिया था।
हजारे ने कहा, ‘‘हम पहले ही कह चुके हैं कि हम किसी दल के साथ नहीं हैं और हम चुनाव लड़ने नहीं जा रहे। मैं 23 मार्च को (केजरीवाल के उपवास में) नहीं जा रहा।’’ सोमवार को रालेगण सिद्धि में हजारे से भेंट करने के बाद केजरीवाल ने कहा था कि इस सप्ताहांत केा सुंदर नगरी में उनके प्रदर्शन में शामिल होने पर वह सहमत हो गए हैं।
जब हजारे से पूछा गया कि क्या वह 23 मार्च के बाद जाएंगे तब उन्होंने कहा कि यदि उनके पास समय रहा तो वह देखेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘अन्य लोगों से बातचीत करने में कोई बुराई नहीं है।’’
हजारे और पूर्व सेनाध्यक्ष वीके सिंह ने कहा कि जनतंत्र मोर्चा के कार्यकर्ता व्यवस्था में संपूर्ण बदलाव लाने की जरूरत के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए 31 मार्च को जालियांवाला बाग से राष्ट्रव्यापी यात्रा शुरू करेंगे। पंजाब और हरियाणा होते हुए यात्रा का पहला चरण पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 17 अप्रैल को समाप्त होगा।
हजारे ने कहा कि इस दौरान तीन राज्यों में 34 सभाएं होगीं। सिंह ने कहा कि पहले चरण के बाद 13 दिन का अंतराल होगा और फिर उसके बाद यात्रा चालू होगी एवं इस दौरान राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं झारखंड जनसभाएं की जाएंगी।
नेताओं पर हमला जारी रखते हुए उन्होंने कहा, ‘‘निहित स्वार्थी तत्व की वजह से संसद में प्रदर्शन होते हैं।’’ किम शर्मा, मिंक बरार, कमाल खान, निहिता विस्वास, शकीरा, श्वेता साल्वे, लेडी गागा, पूनम पांडे, अरविंद केजरीवाल, माइक टाइसन, नवजोत सिंह सिद्धू, पीटी ऊषा, जोंटी रोड्स दिखाई देंगे इस बार बिग बॉस के घर में
जनलोकपाल के लिए आंदोलन चलाने वाले अन्ना हजारे के अहम सहयोगी अरविंद केजरीवाल पर चौतरफा वार हो रहा है। कांग्रेस और सरकार ने उन पर निशाना साधा है। सोमवार को मीडिया ने भी उन्हें कठघरे में खड़ा किया है।
आयकर विभाग के नोटिस का जवाब देने की तैयारी कर रहे केजरीवाल के बारे में एक अंग्रेजी अखबार ने खबर दी है कि 2007 में उन्होंने खुद बौंड की शर्त तोड़ने की बात मानी थी। अखबार के मुताबिक सीबीडीटी को जून, 2007 में लिखी गई चिट्ठी में केजरीवाल ने माना था कि नौकरी से दो साल की स्टडी लीव पर जाने से पहले मानी गई एक शर्त का उल्लंघन किया है। चिट्ठी में कहा गया है कि उन्होंने ऐसा 'व्यापक जनहित' में किया है।
दैनिक भास्कर.कॉम ने इस खबर पर केजरीवाल की प्रतिक्रिया लेनी चाही। लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। इस संबंध में उनको भेजे गए ईमेल और एसएमएस के जवाब का इंतजार है।
अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक अरविंद ने आयकर विभाग का नोटिस मिलने पर कहा था कि उन्होंने कोई शर्त नहीं तोड़ी है। लेकिन जून, 2007 में लिखी गई चिट्ठी में अरविंद ने कहा था, 'अध्ययन अवकाश लेने के समय मैंने एक बॉन्ड पर दस्तखत किए थे कि मैं लौटूंगा और सरकार के लिए कम से कम दो साल काम करूंगा। मैं वापस आया और 1 नवंबर, 2002 को नौकरी फिर शुरू की। हालांकि, मैंने सिर्फ अगले एक साल तक काम किया और 1 नवंबर, 2003 के बाद से मैंने असाधारण अवकाश (ईओएल) बिना किसी वेतन के ले लिया और आरटीआई पर काम करने लगा।'
अरविंद ने आगे लिखा, 'मैं एक साल के लिए काम कर सकता था और इस बॉन्ड की शर्तों को पूरा कर सकता था। इसके एवज में मुझे वेतन भी मिलता। हालांकि, मैंने व्यपाक जनहित में काम करने के लिए ईओएल लेने का फैसला किया। चूंकि, मैं बॉन्ड की शर्तों को पूरा नहीं करता हूं। मुझसे कहा जा रहा है कि मैं वह वेतन विभाग को लौटा दूं जो मुझे स्टडी लीव के दौरान मिली थी। छुट्टी के नियम 63 (3) का हवाला देते हुए केजरीवाल ने लिखा कि छुट्टी के दौरान और उसके बाद भी उनका समय और काम जनहित से जुड़ा था और उनके काम को देश और देश के बाहर मैगसेसे अवॉर्ड और सत्येंद्र दुबे मेमोरियल अवॉर्ड के जरिए पहचान मिली है। चूंकि उन्होंने पुरस्कार के तौर पर मिली रकम दान दे ही, इसलिए उनके पास तनख्वाह लौटाने के पैसे नहीं हैं।'
केजरीवाल ने 20 फरवरी, 2006 को आयकर विभाग से इस्तीफा दे दिया था। लेकिन अभी तक उनका इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ है। आयकर विभाग ने केजरीवाल को इस्तीफे से पहले कई चिट्ठियां भेजी थीं। इन चिट्ठियों में विभाग ने काम पर लौटने करने या फिर केंद्रीय लोक सेवा नियमों के तहत कार्रवाई का सामना करने की बात कही थी।
2006 तक आयकर विभाग ने न सिर्फ अरविंद की नामौजूदगी पर सवाल खड़े करने के अलावा स्टडी रिपोर्ट को जमा न करने, चंडीगढ़ में पोस्टिंग के बावजूद दिल्ली में बने रहना और एनजीओ परिवर्तन के लिए आरटीआई पर सरकार से बिना इजाजत लिए काम करने पर सवाल उठाए थे।
सीबीडीटी ने जनवरी, 2006 को केजरीवाल को चिट्ठी लिखकर पूछा, 'आपने न तो जरूरी दस्तावेज जमा किए हैं और न ही आप नौकरी कर रहे हैं। इसके बाद ही केजरीवाल ने इस्तीफा देने का फैसला किया।'
हालांकि, स्टडी लीव पर जाने से पहले मंजूर शर्त के उल्लंघन का हवाला देते हुए सीबीडीटी ने उनका इस्तीफा मंजूर करने से इनकार कर दिया था। जून, 2007 में अरविंद की छूट की मांग करने वाली चिट्ठी को वित्त मंत्रालय के पास भेजा गया था लेकिन इसे नामंजूर कर दिया गया था।
अप्रैल, 2008 में सीबीडीटी ने दिल्ली के आयकर आयुक्त से कहा कि विभाग केजरीवाल से बकाए की वसूली करे और अनापत्ति प्रमाण पत्र जमा करे ताकि उनके इस्तीफे पर फैसले का काम आगे बढ़े। सीबीडीटी की ओर से 5 अगस्त, 2011 को भेजे गए नोटिस में केजरीवाल से 9.27 लाख रुपये जमा करने को कहा गया है। इस नोटिस के जवाब में अरविंद ने जवाब दिया था, 'मैंने किसी बॉन्ड को नहीं तोड़ा है।'
एक टीवी चैनल के मुताबिक केजरीवाल को शनिवार को यह नोटिस मिला है। इससे पहले प्रशांत भूषण को भी सांसदों पर अपमानजनक टिप्पणी के लिए नोटिस भेजा गया है।
भूषण ने कहा कि उन्होंने टीवी कैमरों के सामन जो कहा उसपर डटे रहेंगे। भूषण ने कहा कि अगर जनहित की बात करने से विशेषाधिकार का हनन होता है तो संसदीय विशेषाधिकार की समीक्षा का समय आ चुका है।
टीम अन्ना के सदस्यों में से किरन बेदी को सबसे पहले विशेषाधिकार हनन का नोटिस भेजा जा चुका है। अरविंद केजरीवाल इन तीनों में आखिरी हैं जिन्हें यह नोटिस मिला। यानी अब टीम अन्ना के अहम मास्टरमाइंड को आरोपी बनाया जा चुका है। ऐसे मामलों में संसद को लगभग सर्वाधिकार है। पूछा जा रहा है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि अन्ना के आंदोलन की मुख्य ताकत बने इन तीनों सदस्यों को इसी मामले की आड़ में जेल में डाल दिया जाए।
अन्ना ने अपने गांव में कहा कि यह सरकार धूर्त(लबाड) लोगों का झुंड है। उन्होंने गृह मंत्री पी. चिदंबरम को बुरा(खोडसाल) बताया। अन्ना ने दिल्ली में अपनी गिरफ्तारी के बाद पुलिस के बार-बार बदलते रुख के लिए यूपीए2 सरकार की तुलना परचूनी की दुकान से कर दी। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि अफसर झूठे हैं, इस देश का क्या होगा?
1. रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर का इस्तेमाल
2. समर्थकों को इंडिया गेट पर जमा होने के लिए कहना
3. इंडिया गेट पर मशाल जुलूस निकाल कर ट्रैफिक रोकना
4. लुटियंस जोन और प्रधानमंत्री निवास के पास धरना देना
2. समर्थकों को इंडिया गेट पर जमा होने के लिए कहना
3. इंडिया गेट पर मशाल जुलूस निकाल कर ट्रैफिक रोकना
4. लुटियंस जोन और प्रधानमंत्री निवास के पास धरना देना
तय हुआ है कि टीम अन्ना को रामलीला मैदान में आंदोलन के लिए दिए गए लिखित हलफनामे की चार अहम शर्ते तोड़ने के आरोप में कठघरे में खड़ा किया जाए। इनमें रात 10 बजे के बाद माइक या लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करना... समर्थकों को इंडिया गेट पर जमा होने के लिए कहना...इंडिया गेट पर मशाल जुलूस निकाल कर ट्रैफिक रोकना... और लुटियंस जोन और प्रधानमंत्री निवास के पास धरना देने के आरोप शामिल है। दरअसल अन्ना को 16 अगस्त को अनशन शुरू करने से पहले ही गिरफ्तार करके पुलिस अपनी खासी फजीहत करा चुकी है... लिहाजा वो फूंक फूंक कर कदम रख रही है... और मुकदमा दर्ज करने से पहले कानूनी जानकारों की राय ली जा रही है।















