नई दिल्ली। भूकंप से शनिवार दोपहर नेपाल समेत पूरा उत्तर भारत हिल गया। दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में भूकंप के झटकों से लोग दहशत में आ गए। करीब दो मिनट तक भूकंप के झटके महसूस किए जाते रहे। भूकंप का केंद्र नेपाल में पोखरा से 80 किलोमीटर दूर और इसकी तीव्रता 7.5 थी।
नेपाल में राजधानी काठमांडू से 35 किमी दूर पश्चिम में जमीन के करीब 33 किमी. नीचे इसका केंद्र था। वैसे, तीव्रता के लिहाज से अब तक का सबसे खतरनाक भूकंप चिली में 22 मई 1960 को आया था। रिक्टर स्केल पर 9.5 तीव्रता वाले इस भूकंप की वजह से आई सुनामी से दक्षिणी चिली, हवाई द्वीप, जापान, फिलीपींस, पूर्वी न्यूजीलैंड, दक्षिण-पूर्व ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों में भयानक तबाही मची थी। कैजुअलिटी के लिहाज से दुनिया का सबसे खतरनाक भूकंप चीन में 1556 में आया था, जिसमें 8.30 लाख लोगों की मौत हुई थी।
ये हैं दुनिया के सबसे विनाशकारी भूकंप
23 जनवरी, 1556 (सांक्सी प्रांत, चीन)
इतिहास में कैजुअलिटी के लिहाज से अब तक का सबसे खतरनाक भूकंप चीन के सांक्सी प्रांत में 23 जनवरी, 1556 को आया था। रिक्टर स्केल पर 8 तीव्रता वाले इस भूकंप से 520 मील (840 किमी.) एरिया तबाह हो गया था। इसका असर सांक्सी प्रांत की करीब 97 काउंटीज पर पड़ा था। भूकंप की वजह से भूस्खलन होने से करीब 8 लाख 30 हजार लोगों की मौत हुई थी।
1 सितंबर 1923 (टोक्यो, जापान) जापान की राजधानी टोक्यो में आया ग्रेट कांटो भूकंप। इसकी वजह से 142,800 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।
15 जनवरी 1934 : (नेपाल, भारत)
नेपाल और बिहार में 8.1 की तीव्रता वाले भूकंप में 10 हजार 700 लोगों की मौत हुई थी.
31 मई, 1935 (क्वेटा, पाकिस्तान)
क्वेटा और उसके आसपास के इलाक़ों में आए ज़बरदस्त भूकंप में लगभग 35 हज़ार लोगों की जानें गईं।
28 जुलाई 1976 (तांगशान, चीन)
चीन का तांगशान शहर 7.8 तीव्रता वाले भूकंप की वजह से मिट्टी में मिल गया था। इसमें 5 लाख से अधिक लोग मारे गए थे।
22 मई, 1960 (वाल्डिविया, चिली)
चिली के वाल्डिविया में रिक्टर स्केल पर 9.5 तीव्रता वाले इस भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी। कहते हैं कि इस भूकंप की ताकत 1 हजार एटम बम के बराबर थी। इसका असर वाल्डिविया से लेकर हवाई द्वीप तक था। इसमें 6 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी, जबकि लाखों लोग बेघर हो गए थे।
20 अगस्त 1988 : (नेपाल, भारत)
नेपाल में 6.8 की तीव्रता वाले भूकंप में 721 लोगों की नेपाल में और पडोसी भारतीय राज्य बिहार में 277 लोगों की मौत.
21 जून 1990 (गिलान, ईरान)
ईरान के उत्तरी राज्य गिलान में आए भूकंप ने 40 हज़ार से भी अधिक लोगों की जान ले ली थी।
17 अगस्त 1999 (इमिट व इस्तांबुल, तुर्की)
तुर्की के इमिट और इंस्ताबुल शहरों में रिक्टर स्केल पर 7.4 तीव्रता का भूकंप आया. इस भूकंप की वजह से 17 हज़ार से अधिक लोग मारे गए और हज़ारों अन्य घायल हुए। 30 सितम्बर 1993 :(भारत)
महाराष्ट्र में 6.3 की तीव्रता के भूकंप में 7601 की मौत.
20 अक्तूबर 1991 :(भारत)
भारत के उत्तरप्रदेश में 6.6 की तीव्रता वाले भूकंप में 768 लोगों की मौत.
26 जनवरी 2001 :(भारत)
भारत के गुजरात में 7.7 की तीव्रता वाले भूकंप में 25 हजार लोगों की मौत और एक लाख 66 हजार जख्मी.
26 दिसम्बर 2003 :(ईरान)
ईरान के शहर बाम में 6.7 की तीव्रता के भूकंप में कम से कम 31 हजार 884 लोगों की मौत और 18 हजार जख्मी.
26 दिसंबर, 2004, (श्रीलंका, फिलीपींस व दक्षिणी भारत)
भूकंप के कारण पैदा हुईं सुनामी लहरों ने एशिया में 2 लाख 30 हजार लोगों की जान ले ली थी। 8.9 तीव्रता वाले इस भूकंप के कारण लाखों लोग बेघर हो गए थे।
28 मार्च 2005 :(इंडोनेशिया)
इंडोनेशिया के न्यास द्वीप पर भूकंप से 900 लोगों की मौत.
8 अक्तूबर, 2005 (पाकिस्तान)
पाकिस्तान में 7.6 तीव्रता वाला भीषण भूकंप आया, जिसमें करीब 75 हज़ार लोग मारे गए। करीब 35 लाख लोग बेघर हुए थे.
27 मई 2006 :(इंडोनेशिया)
इंडोनेशिया के योगयाकार्ता क्षेत्र में आए शक्तिशाली भूकंप में 6000 लोगों की मौत और 15 लाख से ज्यादा लोग बेघर.
12 मई 2008 :(चीन)
चीन के दक्षिण पश्चिम प्रांत सिचुआन में 8.0 की तीव्रता वाले भूकंप से 87 हजार से ज्यादा लोगों की मौत या लापता.
12 जनवरी 2010 :(हैती)
हैती में 7.0 की तीव्रता वाले भूकंप से ढाई लाख से तीन लाख के बीच लोगों की मौत.
14 अप्रैल 2010 :(चीन)
उत्तर पश्चिम चीन के क्विंघाई प्रांत के युशु काउंटी में 6.9 की तीव्रता वाले भूकंप में तीन हजार लोगों की मौत और कई लापता.
11 मार्च 2011 :(जापान)
जापान के उत्तर पूर्वी तट पर समुद्र के नीचे 9.0 की तीव्रता के भूकंप आने के बाद आई सुनामी से करीब 18 हजार 900 लोगों की मौत. फुकुशिमा डाईची परमाणु संयंत्र में संकट पैदा हुआ.
23 अक्तूबर 2011 :(पूर्वी तुर्की)
पूर्वी तुर्की में 7.2 की तीव्रता वाले भूकंप से तबाही. 600 से ज्यादा लोगों की मौत और कम से कम 4150 जख्मी.
11 अगस्त 2012 :(ईरान)
ईरान के शहर तबरीज में 6.3 और 6.4 की तीव्रता वाले दो भूकंपों से 306 लोगों की मौत और तीन हजार से ज्यादा लोग जख्मी.
नेपाल में राजधानी काठमांडू से 35 किमी दूर पश्चिम में जमीन के करीब 33 किमी. नीचे इसका केंद्र था। वैसे, तीव्रता के लिहाज से अब तक का सबसे खतरनाक भूकंप चिली में 22 मई 1960 को आया था। रिक्टर स्केल पर 9.5 तीव्रता वाले इस भूकंप की वजह से आई सुनामी से दक्षिणी चिली, हवाई द्वीप, जापान, फिलीपींस, पूर्वी न्यूजीलैंड, दक्षिण-पूर्व ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों में भयानक तबाही मची थी। कैजुअलिटी के लिहाज से दुनिया का सबसे खतरनाक भूकंप चीन में 1556 में आया था, जिसमें 8.30 लाख लोगों की मौत हुई थी।
ये हैं दुनिया के सबसे विनाशकारी भूकंप
23 जनवरी, 1556 (सांक्सी प्रांत, चीन)
इतिहास में कैजुअलिटी के लिहाज से अब तक का सबसे खतरनाक भूकंप चीन के सांक्सी प्रांत में 23 जनवरी, 1556 को आया था। रिक्टर स्केल पर 8 तीव्रता वाले इस भूकंप से 520 मील (840 किमी.) एरिया तबाह हो गया था। इसका असर सांक्सी प्रांत की करीब 97 काउंटीज पर पड़ा था। भूकंप की वजह से भूस्खलन होने से करीब 8 लाख 30 हजार लोगों की मौत हुई थी।
1 सितंबर 1923 (टोक्यो, जापान) जापान की राजधानी टोक्यो में आया ग्रेट कांटो भूकंप। इसकी वजह से 142,800 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।
15 जनवरी 1934 : (नेपाल, भारत)
नेपाल और बिहार में 8.1 की तीव्रता वाले भूकंप में 10 हजार 700 लोगों की मौत हुई थी.
31 मई, 1935 (क्वेटा, पाकिस्तान)
क्वेटा और उसके आसपास के इलाक़ों में आए ज़बरदस्त भूकंप में लगभग 35 हज़ार लोगों की जानें गईं।
28 जुलाई 1976 (तांगशान, चीन)
चीन का तांगशान शहर 7.8 तीव्रता वाले भूकंप की वजह से मिट्टी में मिल गया था। इसमें 5 लाख से अधिक लोग मारे गए थे।
22 मई, 1960 (वाल्डिविया, चिली)
चिली के वाल्डिविया में रिक्टर स्केल पर 9.5 तीव्रता वाले इस भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी। कहते हैं कि इस भूकंप की ताकत 1 हजार एटम बम के बराबर थी। इसका असर वाल्डिविया से लेकर हवाई द्वीप तक था। इसमें 6 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी, जबकि लाखों लोग बेघर हो गए थे।
20 अगस्त 1988 : (नेपाल, भारत)
नेपाल में 6.8 की तीव्रता वाले भूकंप में 721 लोगों की नेपाल में और पडोसी भारतीय राज्य बिहार में 277 लोगों की मौत.
21 जून 1990 (गिलान, ईरान)
ईरान के उत्तरी राज्य गिलान में आए भूकंप ने 40 हज़ार से भी अधिक लोगों की जान ले ली थी।
17 अगस्त 1999 (इमिट व इस्तांबुल, तुर्की)
तुर्की के इमिट और इंस्ताबुल शहरों में रिक्टर स्केल पर 7.4 तीव्रता का भूकंप आया. इस भूकंप की वजह से 17 हज़ार से अधिक लोग मारे गए और हज़ारों अन्य घायल हुए। 30 सितम्बर 1993 :(भारत)
महाराष्ट्र में 6.3 की तीव्रता के भूकंप में 7601 की मौत.
20 अक्तूबर 1991 :(भारत)
भारत के उत्तरप्रदेश में 6.6 की तीव्रता वाले भूकंप में 768 लोगों की मौत.
26 जनवरी 2001 :(भारत)
भारत के गुजरात में 7.7 की तीव्रता वाले भूकंप में 25 हजार लोगों की मौत और एक लाख 66 हजार जख्मी.
26 दिसम्बर 2003 :(ईरान)
ईरान के शहर बाम में 6.7 की तीव्रता के भूकंप में कम से कम 31 हजार 884 लोगों की मौत और 18 हजार जख्मी.
26 दिसंबर, 2004, (श्रीलंका, फिलीपींस व दक्षिणी भारत)
भूकंप के कारण पैदा हुईं सुनामी लहरों ने एशिया में 2 लाख 30 हजार लोगों की जान ले ली थी। 8.9 तीव्रता वाले इस भूकंप के कारण लाखों लोग बेघर हो गए थे।
28 मार्च 2005 :(इंडोनेशिया)
इंडोनेशिया के न्यास द्वीप पर भूकंप से 900 लोगों की मौत.
8 अक्तूबर, 2005 (पाकिस्तान)
पाकिस्तान में 7.6 तीव्रता वाला भीषण भूकंप आया, जिसमें करीब 75 हज़ार लोग मारे गए। करीब 35 लाख लोग बेघर हुए थे.
27 मई 2006 :(इंडोनेशिया)
इंडोनेशिया के योगयाकार्ता क्षेत्र में आए शक्तिशाली भूकंप में 6000 लोगों की मौत और 15 लाख से ज्यादा लोग बेघर.
12 मई 2008 :(चीन)
चीन के दक्षिण पश्चिम प्रांत सिचुआन में 8.0 की तीव्रता वाले भूकंप से 87 हजार से ज्यादा लोगों की मौत या लापता.
12 जनवरी 2010 :(हैती)
हैती में 7.0 की तीव्रता वाले भूकंप से ढाई लाख से तीन लाख के बीच लोगों की मौत.
14 अप्रैल 2010 :(चीन)
उत्तर पश्चिम चीन के क्विंघाई प्रांत के युशु काउंटी में 6.9 की तीव्रता वाले भूकंप में तीन हजार लोगों की मौत और कई लापता.
11 मार्च 2011 :(जापान)
जापान के उत्तर पूर्वी तट पर समुद्र के नीचे 9.0 की तीव्रता के भूकंप आने के बाद आई सुनामी से करीब 18 हजार 900 लोगों की मौत. फुकुशिमा डाईची परमाणु संयंत्र में संकट पैदा हुआ.
23 अक्तूबर 2011 :(पूर्वी तुर्की)
पूर्वी तुर्की में 7.2 की तीव्रता वाले भूकंप से तबाही. 600 से ज्यादा लोगों की मौत और कम से कम 4150 जख्मी.
11 अगस्त 2012 :(ईरान)
ईरान के शहर तबरीज में 6.3 और 6.4 की तीव्रता वाले दो भूकंपों से 306 लोगों की मौत और तीन हजार से ज्यादा लोग जख्मी.
अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन ने खुलासा किया है कि चीन ने भारतीय सीमा के पास परमाणु क्षमता से लैस अत्याधुनिक सीएसएस-5 एमआरबीएम मिसाइलें तैनात कर दी हैं।
चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने पहले भारतीय बॉर्डर पर लिक्विड ईंधन वाली सीएसएस-2 आईआरबीएम मिसाइलें तैनात कर रखी थीं। लेकिन अब ठोस ईंधन वाली सीएसएस-5 एमआरबीएम मिसाइलों को इनकी जगह तैनात कर दिया गया है। चीन की सैन्य क्षमता पर अपनी सालाना रिपोर्ट में पेंटागन ने यह दावा किया।
बॉर्डर पर इन्फ्रास्ट्रक्चर: रिपोर्ट के मुताबिक, चीन बॉर्डर के पास बुनियादी ढांचे के विकास में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है। भारतीय बॉर्डर के पास कई सड़कों और रेल नेटवर्क बनाए गए हैं। हालांकि ये विकास कार्य पश्चिमी चीन में आथिर्क विकास के मकसद से किए गए हैं, लेकिन इससे पीएलए के रक्षा अभियानों में मदद मिलेगी। पेंटागन का कहना है कि पाकिस्तान से चीन के नजदीकी सैन्य रिश्तों और हिंद महासागर, मध्य एशिया व अफ्रीका में चीन के बढ़ते दखल को लेकर भारत की चिंता बनी हुई है।
भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से लगायत लेह लद्दाख में सीमा के नजदीक चीनी सेना की अगुवाई में चल रहे बुनियादी ढांचे के निर्माण से भारत की चिंता बढ़ रही है। लेकिन चीन की हरकतों से चिंतित भारत ने जवाबी तैयारी शुरू कर दी है। चीन की अरुणाचल प्रदेश पर टेढ़ी नज़र है। इसे देखते हुए भारत ने पूर्वोत्तर के इस राज्य में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे को विकसित करने का फैसला किया है। इस राज्य में तीन रेलवे ट्रैक बिछाने की योजना तैयार की है। इसमें एक ट्रैक रणनीतिक तौर पर अहम तवांग को असम से जोड़ेगा।
मीडिया में आई खबरों के मुताबिक स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि मिसामारी (असम)-तवांग, उत्तरी लखीमपुर (असम)- अलॉन्ग (अरुणाचल प्रदेश)-सीलापाथर (असम) और मुर्कान्गसेलेक (असम)- पासीघाट (अरुणाचल)- रुपई (असम) को जोड़ने के लिए रेलवे ट्रैक बिछाने का प्रस्ताव भेज दिया गया है। इन तीनों रेल लाइनों तवांग को जोड़ने वाली रेल लाइन सबसे अहम है। तवांग भारतीय सेना का बड़ा केंद्र है। मौजूदा समय में तवांग जाने के लिए सड़क का इस्तेमाल करना होता है जो खराब मौसम के चलते बंद भी हो जाती है। वहीं, ऐसे मौसम में हेलीकॉप्टर से भी नहीं चलते हैं, जिससे तवांग पहुंचना मुश्किल होता है।
वहीं, जापान चीन की बढ़ती सामरिक ताकत से परेशान है। चीन ने हाल ही में पूर्व सोवियत संघ से लाए गए 60,000 टन वजन के एयरक्राफ्ट करियर को अपने बेड़े में शामिल किया है। जानकार मानते हैं कि अगर यह जहाज समुद्र में अभ्यास के लिए नहीं भेजा जाता है तो चीन की नौसेना इसका इस्तेमाल युद्ध के दौरान होने वाली गतिविधियों के अभ्यास में कर सकता है। वहीं, चीन शंघाई में खुद एक एयरक्राफ्ट करियर का निर्माण कर रहा है। चीन ने गहरे समुद्र में अपनी गतिविधियां तेज करने के लिए अब एयरक्राफ्ट करियर के बेडे़ तैनात करने की योजना बनाई है। चीन अमेरिकी नौसेना को क्युशु, ओकीनावा और ताइवान और फिलीपींस की तरफ आने से रोकना चाहता है। वहीं, चीन मध्य 2030 तक ओगासवारा द्वीप, गुआम और पापुआ न्यू गिनी के आसपास हवा और समुद्र में अपनी ताकत को बहुत ज़्यादा बढ़ाना चाहता है।
चीन की सेना कैरियर किलर एंटीशिप बैलिस्टिक मिसाइल का विकास भी कर रही है। ऐसा माना जा रहा है कि ये कैरियर किलर मिसाइलें अमेरिका के समेत चीन के दुश्मन देशों के खिलाफ इस्तेमाल की जा सकती हैं। इसके अलावा चीन के दक्षिण में समुद्र में मौजूद प्राकृतिक गैस और दूसरे संसाधनों पर कब्जा जमाया जाए।
दूसरी ओर, चीन सरकार द्वारा नियंत्रित क्रेडिट रेटिंग एजेंसी डेगॉन्ग ग्लोबल क्रेडिट रेटिंग ने अमेरिका की रेटिंग को नेगेटिव कर दिया है। जानकार मानते हैं कि इससे चीन द्वारा खरीदे जाने वाले अमेरिकी बॉन्ड में कमी आएगी, जिससे अमेरिका की कर्ज लेने की क्षमता घटेगी।
