उत्तराखंड में बीजेपी विधायक दल की बैठक के बाद निशंक अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों बंशीधर भगत, मदन कौशिक, खजान दास और गोविन्द सिंह बिष्ट के साथ राजभवन पहुंचे और अल्वा को अपना इस्तीफा सौंप दिया। राजभवन सूत्रों ने बताया कि अल्वा ने निशंक को अपनी शुभकामनाएं देते हुए उनके कार्यों की प्रशंसा की। निशंक के स्थान पर भुवन चन्द्र खंडूरी ने नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली।
गौरतलब है कि शनिवार को पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कहा था कि निशंक की घटती लोकप्रियता के कारण पार्टी को चुनावों से पहले यह निर्णय लेना पड़ा है। हालांकि, गडकरी ने कहा कि निशंक को पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी। खंडूरी ने सवा दो साल बाद एक बार फिर मुख्यमंत्री की कमान संभाली है। लोकसभा चुनाव में उत्तराखंड में बीजेपी की हार के बाद खंडूरी को इस्तीफा देना पड़ा था। उत्तराखंड की सभी लोकसभा सीटों पर हार की जवाबदेही खंडूरी पर डाल दी गई थी। यही नहीं तब पार्टी के अंदर भी उनके खिलाफ बगावत हो गई थी। राज्य के 8 विधायकों ने खंडूरी को हटाने के लिए इस्तीफा दे डाला था। खंडूरी के इस्तीफे के बाद रमेश पोखरियाल निशंक को सीएम बनाया गया। निशंक के कार्यकाल में बीजेपी सरकार पर करप्शन के कई आरोप लगे। हालांकि गडकरी ने इन आरोपों की मीडिया की चर्चा बताकर खारिज करते हुए कहा कि निशंक पर कोई आरोप नहीं है। उन्हें दूसरी अहम जिम्मेदारी सौंपने की बात भी गडकरी ने कही।
निशंक को पहले ही पार्टी का फैसला बता दिया गया और इस्तीफा देने को कहा गया। निशंक ने संसदीय दल के सामने अपने पक्ष में कई दलीलें रखीं लेकिन कोई उनकी कुर्सी नहीं बचा सकी। उत्तराखंड बीजेपी में निशंक के हटने का जैसे इंतजार हो रहा था, इधर निशंक के इस्तीफे की खबर आई उधर राजधानी देहरादून में आतिशबाजी का दौर शुरू हो गया जो देर रात तक चलता रहा।
रविवार को भुवन चंद्र खंडूड़ी दोबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे उधर निशंक राज्यपाल माग्रेट अल्वा को अपना इस्तीफा सौंप देंगे।
संसदीय दल की बैठक में पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी, नेता विपक्ष नेता सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, धर्मेंद्र प्रधान, थावर चंद गहलौत, राजनाथ सिंह और अनंत कुमार की मौजूदगी में निशंक से इस्तीफा मांग लिया गया।
निशंक के इस्तीफा से ज्यादा मुश्किल बीजेपी के लिए खंडूड़ी को दोबारा मुख्मंत्री बनाना था। निशंक ने तो खंडूरी का विरोध किया ही कई केन्द्रीय नेता भी इससे सहमत नहीं दिखे। सूत्रों के मुताबिक निशंक ने एक सीड़ी के माध्यम से अपनी सरकार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की जानकारी भी नेताओं को दी इसमें सरकार के खिलाफ खंडूड़ी के अभियान का भी उल्लेख था। हालांकि पार्टी नेतृत्व पर निशंक की दलीलों का ज्यादा असर नहीं पड़ा।
खंडूरी के नाम पर निशंक को राजी करने के लिए राजनाथ सिंह और अनंत कुमार को लगाया गया। दोनों ने आधा घंटे तक निशंक को समझाबुझाकर किसी तरह तैयार कर लिया। इसके बाद पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने निशंक के इस्तीफे व खंडूड़ी के नए मुख्यमंत्री होने की घोषणा की। सूत्रों के अनुसार राज्य में चुनाव संचालन की कमान पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी को सौंपी जा सकती है। हालांकि कोश्यारी कोई जिम्मेदारी लेने के इच्छुक नहीं है। पार्टी महासचिव रविशंकर प्रसाद विधायक दल की बैठक में बतौर पर्यवेक्षक मौजूद रहेंगे। सोमवार से शुरू हो रहे पितृ पक्ष के चलते रविवार को ही नए मुख्यमंत्री की शपथ हो जाएगी।
बीजेपी हाईकमान ने रमेश पोखरियाल निशंक की छुट्टी कर दी और एक बार फिर राज्य की कमान बी सी खंडूरी के हाथों में होगी। बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने शाम को इसका ऐलान किया। राज्य में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए ये फेरबदल किए गए हैं। दरअसल निशंक की लोकप्रियता गिरती जा रही थी जिसकी वजह से पार्टी को ये फैसला लेना पड़ा।
नितिन गडकरी ने साफ कर दिया कि निशंक पर कोई आरोप नहीं हैं। उन्हें पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी। गडकरी ने बताया कि नए नेता का औपचारिक चुनाव रविवार को पार्टी के विधायक करेंगे।
गौरतलब है कि निशंक को सीएम पद से हटाए जाने की चर्चा पिछले कई दिनों से चल रही थी। सीएम पद की दौड़ में खंडूरी के अलावा प्रकाश पंत और त्रिवेंद्र सिंह रावत भी बताए जा रहे थे। शनिवार रात को गडकरी के निवास पर हुई बैठक में खंडूरी के नाम पर अंतिम मुहर लगाई गई।
निशंक को हटाने और उनका विकल्प खोजने के इरादे से गुरुवार को बीजेपी की संसदीय बोर्ड की मीटिंग भी हुई थी। हालांकि उस दिन कोई फैसला नहीं हो सका था। इस दौरान निशंक ने दिल्ली बीजेपी आलाकमान से मुलाकात कर खुद इस्तीफे की पेशकश कर डाली थी। उत्तराखंड में निशंक का काम पार्टी को नहीं भाया और भ्रष्टाचार के कई मामले राज्य में बीजेपी की छवि भी खराब कर रहे हैं इसलिए पार्टी ने निशंक को हटाने का फैसला किया।
लोकसभा चुनाव में हार ने ली थी खंडूरी की कुर्सी
खंडूरी सवा दो साल बाद एक बार फिर मुख्यमंत्री की कमान संभालेंगे। लोकसभा चुनाव में उत्तराखंड में बीजेपी की हार के बाद खंडूरी को इस्तीफा देना पड़ा था। उत्तराखंड की सभी लोकसभा सीटों पर हार की जवाबदेही खंडूरी पर डाल दी गई थी। यही नहीं तब पार्टी के अंदर भी उनके खिलाफ बगावत हो गई थी। राज्य के 8 विधायकों ने खंडूरी को हटाने के लिए इस्तीफा दे डाला था। खंडूरी के इस्तीफे के बाद रमेश पोखरियाल निशंक को सीएम बनाया गया। निशंक के कार्यकाल में बीजेपी सरकार करप्शन के कई मामलों में फंसी। निशंक की घटती लोकप्रियता के कारण चुनावों से ऐन पहले पार्टी को एक बार फिर साफ छवि के खंडूरी को याद करना पड़ा।