पेट्रोल और डीज़ल के दामों में प्रति लीटर तीन रुपये से ज्यादा की वृद्धि की गई है.
सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑइल के अनुसार शनिवार मध्य रात्रि से पेट्रोल के दामों में 3.18 रुपये और डीजल के दामों में 3.09 रुपये की वृद्धि की गई है.
दामों में वृद्धि की ये घोषणा शनिवार को आम बजट आने के बाद की गई है.
पिछले कुछ दिनों में लगातार दूसरी बार पेट्रोल और डीज़ल के खुदरा दामों में बढ़ोत्तरी की गई है. इंडियन ऑइल कॉरपोरेशन ने अपने बयान में कहा है कि पेट्रोल और डीज़ल दोनों की कीमतों में अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में बढ़ोत्तरी हुई है. साथ ही रुपये की तुलना में डॉलर की क़ीमत में भी बढ़ोत्तरी हुई है.
बयान के मुताबिक इन दोनों वजहों से पेट्रोल और डीज़ल के दाम बढ़ाना ज़रूरी हो गया था. बयान में ये भी कहा गया है कि आगे भी अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में पेट्रोल और डीज़ल के दामों में बढ़ोत्तरी और डॉलर-रुपए संबंध का असर पेट्रोल और डीज़ल के दामों पर दिखाई पड़ेगा.
पिछले कुछ दिनों में लगातार दूसरी बार पेट्रोल और डीज़ल के खुदरा दामों में बढ़ोत्तरी की गई है. इंडियन ऑइल कॉरपोरेशन ने अपने बयान में कहा है कि पेट्रोल और डीज़ल दोनों की कीमतों में अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में बढ़ोत्तरी हुई है. साथ ही रुपये की तुलना में डॉलर की क़ीमत में भी बढ़ोत्तरी हुई है.
बयान के मुताबिक इन दोनों वजहों से पेट्रोल और डीज़ल के दाम बढ़ाना ज़रूरी हो गया था. बयान में ये भी कहा गया है कि आगे भी अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में पेट्रोल और डीज़ल के दामों में बढ़ोत्तरी और डॉलर-रुपए संबंध का असर पेट्रोल और डीज़ल के दामों पर दिखाई पड़ेगा.
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लगातार सस्ता होता कच्चा तेल
कच्चे तेल की कीमत में लगातार कमी के कारण पेट्रोलियम पदार्थों के दाम कम होने की उम्मीद की जा रही थी। चीन, यूरोप, जापान में विकास की धीमी रफ्तार से कच्चे तेल की मांग घटी है। जबकि आपूर्ति बढ़ी है। विशेषज्ञ कच्चे तेल के और कम होने का अंदाजा लगा रहे हैं। यानी आने वाले महीनों में और कटौती हो सकती है।
भारत का आयात बिल घटा
भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। कच्चे तेल की कीमतों में आ रही कमी के कारण भारत के आयात बिल पर 9 से 10 डॉलर प्रति बैरल की बचत हो रही थी।
अमेरिका में शेल ऑइल का उत्पादन बढ़ा
अमेरिका में पिछले 6 महीने में शेल ऑइल का घरेलू उत्पादन बढ़कर दोगुना हो गया है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की मांग कम हो रही है और कीमतें गिर रही हैं। तेल उत्पादन करने वाले देशों का भी कहना है कि अगर कच्चा तेल 40 डॉलर प्रति बैरल तक आ जाए, तब भी वे कमाई पर घाटा उठाने को राजी हैं। वजह साफ है कि तेल उत्पादन करने वाले खाड़ी के देश तेल के खेल में अमेरिका की बढ़त रोकना चाहते हैं।
दूघ के दाम में आग लगी हुई है। दूघ कंपनियां किसानों की दुहाई देकर आम आदमी की जेव खाली कर रही हैं । उधर इन कंपनियों को दूध सप्लाई करने वाले किसानों ने कंपनियों पर मुनाफाखोरी का आरोप लगा दिया है ।
दूधवालों ने आरोप लगाया है कि ग्राहकों को नकली और मिलावटी दूध बेचकर कंपनियां छह लाख करोड़ से अधिक का घोटाला कर चुकी हैं। दूधियों के मुताबिक उनसे 18 रुपये लीटर दूध खरीदकर बाजार में 40 रुपये में बेचा जा रहा है। दूधियों के संगठन ने दावा किया कि अगर सरकार दूध की मंडी चालू कर दी जाए तो दूध की कीमत छह रुपये घटकर 34 रुपये हो सकती है।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन करने पहुंचे दूधियों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वो आने वाले दिनों में सड़कों पर इस लड़ाई को लड़ेंगे। ग्वाला गद्दी समिति ने ऐलान किया है कि 22 अप्रैल को देशभर में आंदोलन होगा और फिर भी सरकार ने मांग नहीं मानी तो वो अपने मवेशियों के साथ 25 अप्रैल को संसद का घेराव करेंगे।
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किसानों का कहना है कि कंपनियां ग्राहकों को किसानों के नाम पर लूट रही हैं जबकि उन्हें तो बहुत मामूली कीमत ही दी जा रही है।दूधवालों ने आरोप लगाया है कि ग्राहकों को नकली और मिलावटी दूध बेचकर कंपनियां छह लाख करोड़ से अधिक का घोटाला कर चुकी हैं। दूधियों के मुताबिक उनसे 18 रुपये लीटर दूध खरीदकर बाजार में 40 रुपये में बेचा जा रहा है। दूधियों के संगठन ने दावा किया कि अगर सरकार दूध की मंडी चालू कर दी जाए तो दूध की कीमत छह रुपये घटकर 34 रुपये हो सकती है।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन करने पहुंचे दूधियों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वो आने वाले दिनों में सड़कों पर इस लड़ाई को लड़ेंगे। ग्वाला गद्दी समिति ने ऐलान किया है कि 22 अप्रैल को देशभर में आंदोलन होगा और फिर भी सरकार ने मांग नहीं मानी तो वो अपने मवेशियों के साथ 25 अप्रैल को संसद का घेराव करेंगे।
अगले कुछ ही दिनों में पेट्रोल की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है। विधानसभा चुनाव खत्म हो चुके हैं लिहाजा कीमतों को लेकर सरकार पर पब्लिक का कोई दबाव नहीं है। उधर तेल कंपनियां लगातार सरकार को तेल की अंतर्राष्ट्रीय कीमतों में इजाफे की दुहाई दे रही हैं। जानकारों की मानें तो ऑयल माकेर्टिंग कंपनियां पेट्रोल के दाम में 5 रुपए लीटर तक की बढ़ोतरी की तैयारी कर रही हैं। हालाकि सरकार कीमतें तय करने को लेकर तेल कंपनियों को पूरी तरह छूट दे चुकी है। ऑइल मार्केटिंग कंपनियों का कहना है कि इससे उनके घाटे में कमी आएगी। अब देखने वाली बात ये होगी कि आम आदमी की जेब पर ये तेल कंपनियां कितना बड़ा वार करती हैं।
राज्यों में चुनाव खत्म हो चुके हैं अब महंगाई का चाबुक खाने के लिए तैयार हो जाइए... GoTvNews
महंगाई की मार का पहला वार हो चुका है... और इसकी शुरूआ;त हुई है दिल्ली और एनसीआर से... सरकार ने यहां सीएनजी के दामों में बढ़ा दिए हैं। नई दरें सोमवार रात 12 बजे के बाद से लागू हो गईं। दिल्ली में सीएनजी के दाम 1.70 रुपये प्रति किलो बढ़ाये गए हैं। यहां गैस की कीमत 35.45 रुपये प्रतिकिलो हो गई है। जबकि 1.90 के इजाफे के साथ बाद नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में एक किलो सीएनजी के लिए 39.80 रुपये चुकाने होंगे। नई कीमतें सोमवार रात 12 बजे के बाद से लागू हो जाएगीं।
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वालमार्ट, टेस्को और कैरफोर जैसे दुनिया के बड़े रिटेल स्टोर्स के आउटलेट आपको अपने शहर में भी नज़र आ सकते हैं। आज दिल्ली में होने वाली कैबिनेट की बैठक में सरकार मल्टीब्रांड रिटेल सेक्टर में 51 फीसदी विदेशी निवेश को मंज़ूरी दे सकती है। सिंगल ब्रांड रिटेल में 100 फीसदी विदेशी निवेश की इजाज़त होगी।जानकारों का मानना है कि विदेशी निवेश आने से रुपए की खस्ता हालत में सुधार होगा। हालांकि आम ग्राहक से सीधे जुड़ा रिटेल सैक्टर का मामला सियासी तौर पर भी संजीदा है लेकिन वित्त मंत्रालय समेत ज्यादातर मंत्रालय इसे विदेशी निवेश के लिए खोलने के पक्ष में हैं। वैसे विपक्ष के विरोध के चलते ये फैसला पिछले दो साल से लटका पड़ा है।
विपक्ष की दलील है कि रिटेल सैक्टर छोटे कारोबारियों के भरोसे चलता है। लिहाज़ा इस गैरसंगठित सैक्टर में बड़ी विदेशी कंपनियों की घुसपैठ बेरोज़गारी को बढ़ावा देगी।
विपक्ष ही नहीं सरकार को सहयोगियों का भी विरोध झेलना पड़ेगा। ममता बनर्जी ने इस फैसले पर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर कर दी है। भारत एक बड़ा बाज़ार है, लिहाज़ा दुनिया की कई बड़ी कंपनियां सरकार के इस फैसले की तरफ हसरत भरी निगाहों से ताक रही हैं।
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हलांकि उन अधिकारियों के जेल जाने का असर कंपनी के शेयरों पर नहीं पड़ा था। लेकिन पिछले दिनों सीबीआई ने कहा था कि स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। और इस मामले में अब अनिल अंबानी से भी पूछताछ की जाएगी। जिसके बाद एडीएजी के शेयरों में भारी बिकवाली देखी जा रही है।
हकीकत ये है कि दुनिया के तमाम देशों के मुकाबले पेट्रोल भारतीयों की जेब कुछ ज्यादा ही जला रहा है। रिटेल पेट्रोल कीमतों पर नजर के आंकड़े कहते हैं कि भारत में लोगों से पेट्रोल के दाम सबसे ज्यादा लिए जा रहे हैं। भारत में पेट्रोल की कीमत अमेरिका से पांच गुना, रूस और जापान से 3 गुना ज्यादा हैं।
वेनेजुएला - 1.14 रु प्रति लीटर,
ईरान में - 4.8 रु प्रति लीटर
अमेरिका - 42.82 रु प्रति लीटर
पेट्रोल कीमतों को भारतीय मुद्रा में बदलें तो भारत में पेट्रोल की कीतम 98 देशों से महंगी है।ईरान में - 4.8 रु प्रति लीटर
अमेरिका - 42.82 रु प्रति लीटर
इन देशों में लोगों की क्रय शक्ति और आमदनी भारत से कहीं ज्यादा है और तेल की कीमत कम है। इस लिहाज से भारत में पेट्रोल के दाम आम आदमी पर और भी ज्यादा भारी पड़ते हैं। अगर भारत में लोगों की क्रय शक्ति के आधार पर गणना करें तो
यहां पेट्रोल की रिटेल कीमत 3.95 डॉलर प्रति लीटर बैठती है, जबकि चीन में 1.95 डॉलर, ब्रिटेन में 1.85 डॉलर, ब्राजील में 1.7 डॉलर, जापान में 1.28 डॉलर, रूस में 1.26 डॉलर, अमेरिका में 0.76 डॉलर, सऊदी अरब में 0.23 डॉलर और वेनेजुएला में 0.03 डॉलर बैठती है। साफ है कि भारत में पेट्रोल अमेरिका के मुकाबले पांच गुना, चीन और ब्रिटेन के मुकाबले दोगुना तथा जापान और रूस के मुकाबले तीन गुना से भी ज्यादा है।
प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध के बाद शनिवार को थोक भाव एक रुपये किलो की कमी हुई। हालांकि इसका असर अभी खुदरा बाजार में दिखाई नहीं दिया है लेकिन उम्मीद की जा रही है कि एक दो दिन में प्याज के दाम और कम होगें और खुदरा बाजार में भी इसका सकारात्मक असर होगा।
महाराष्ट्र और कर्नाटक के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों के किसान प्याज पर निर्यात पर बैन के विरोध कर रहे हैं। दिल्ली की आजादपुर मंडी में प्याज व्यापारी संघ के अध्यक्ष सुरेंद्र बुद्धिराजा कहते हैं कि प्याज का थोक दाम 7 से 12 रुपये प्रति किलो रह गया। शुक्रवार को यह 8 से 13 रुपये किलो के भाव था। सरकार ने गुरुवार को प्याज निर्यात पर बैन लगाया था। उसके बाद शुक्रवार को प्याज की थोक कीमतों में 4 रुपये प्रति किलो तक की गिरावट आई थी।
खबर है कि फोर्ड कंपनी फिएस्टा ईकोनेटिक को इस महीने के मध्य में शुरू होने वाले फ्रैंकफर्ट ऑटो शो में पेश कर सकती है। बताया जा रहा है कि इस कार में 1.6 लीटर का टीडीसी आई 4 सिलिंडर इंजन लगाया गया है। यह भी कहा जा रहा है कि यह कार काफी कम प्रदूषण करेगी। हालांकि अब तक कंपनी की तरफ से इस कार की कीमत और भारत में इसकी लांचिंग के बारे में कुछ नहीं बताया गया है।
बैंकिंग ओम्बड्समैन कॉन्फ्रेंस के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने एक बयान में कहा है, ' बैंकों को फ्लोटिंग रेट लोन पर प्री-पेमेंट चार्ज नहीं वसूलना चाहिए। फ्लोटिंग रेट लोन में ब्याज दर का जोखिम बैंकों पर नहीं रह जाता है। वे इसका प्रबंधन करने में सक्षम हैं। बैंक सिर्फ संभावित क्रेडिट रिस्क वाले इंटरेस्ट रेट रिस्क का विकल्प तलाशते हैं। '
बैंकों के प्री-पेमेंट पेनल्टी लगाने की आलोचना उपभोक्ता समूहों और रेग्युलेटर द्वारा की गई है। इससे व्यक्ति के सामने कर्ज के बोझ से छुटकारा पाने का विकल्प खत्म हो जाता है। बैंक ग्राहकों को दूसरे बैंक की सेवा लेने से रोकने और अपने एसेट-लायबिलिटी के अंतर के प्रबंधन के लिए प्री-पेमेंट पेनल्टी का इस्तेमाल करते आ रहे हैं।
रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने किराया बढ़ाने की योजना का ब्यौरा नहीं दिया। उन्होंने कहा, 'अभी इसे अंतिम रूप नहीं दिया गया और फिलहाल इस पर केवल विचार किया जा रहा है।'
उधर, रेलवे बोर्ड के सूत्रों ने संकेत दिया कि यह बढोतरी ईंधन की लागत के साथ जोड़ी जा सकती है। सूत्रों ने कहा कि किराए में बढ़ोतरी को डीजल तथा बिजली समेत ईंधन कीमत से जोड़ा जा सकता है।
रेलवे के कुल सालाना व्यय में ईंधन पर खर्चा करीब 18 प्रतिशत है। जुलाई में रेल मंत्री का पदभार संभालने के तुरंत बाद उन्होंने कहा था, 'सामान्य वर्ग को प्रभावित किए बिना किराए में बढ़ोतरी पर विचार किया जाएगा। सामान्य वर्ग का इस्तेमाल आमतौर पर गरीब लोग करते हैं जिनकी भुगतान करने की क्षमता को ध्यान में रखा जाएगा।'
दूर-दराज़ रहने वाले दोस्तों-रिश्तेदारों की ख़ैर ख़बर जानने के लिए चिट्ठी का इंतज़ार करती आँखें...डाक टिकिट के लिए डाकघर के चक्कर....पर इनदिनों शहरी इलाक़ों में लोगों के लिए डाकघर बीते ज़माने की बात होते जा रहे हैं.
ग्रामीण इलाक़ों में डाकघर की सार्थकता बनी हुई है पर मोबाइल वगैरह के आने से कई जगह डाकघर पर निर्भरता कम हो रही है.
बदली हुई परिस्थितियों को देखते हुए भारत सरकार डाकघरों को नए रूप में पेश करने की योजना बना रही है. योजना ये है कि डाकघर अपने मूल काम के अलावा बैंकों के तौर पर भी काम करे.
संचार मंत्रालाय में राज्य मंत्री सचिन पायलट इस योजना और इसकी मंशा के बारे में विस्तार से बताते हैं, "चिट्ठी वगैरह भेजने से डाक विभाग को आय होती थी वो कम हो गई है.समय आ गया है कि भारतीय डाक विभाग का नवीनीकरण किया जाए ताकि डाक विभाग की आमदनी बढ़े और बैंकिंग के सेवा उन लोगों तक पहुँच पाए जो अब तक इससे वंचित हैं."अगर मंत्रालय को बैंक शुरु करने के लिए रिज़र्व बैंक से बैंकिंग लाइसेंस मिल जाता है तो योजना को कैबिनेट के पास भेजा जाएगा.
योजना मंज़ूर होने की सूरत में भारतीय डाक विभाग भारत के सबसे बड़े बैंकों में से एक बन सकता है. लेकिन सवाल ये है कि गाँव-कस्बों में रहने वाले लोगों का इससे क्या मूलभूत फ़ायदे होंगे.
सचिन पायलट बताते हैं, "भारत में साढ़े छह लाख गाँवों में से पाँच फ़ीसदी में ही बैंकों की शाखाएँ खुली हुई हैं. समाज के सभी वर्गों को विकासधारा में तभी शामिल किया जा सकता है जब इन इलाक़ों में बैंक खुलेंगे. ऐसे बैंक जो आसान शर्तों पर किसानों को, छोटे उद्योगपतियों, विद्यार्थियों को ऋण मुहैया करा सके. इन लोगों को अब तक ये सुविधा नहीं मिल पाई है. अगर हमें बैंक लाइसेंस मिलता है तो ये सब काम हम कर पाएँगे."
भारत में कुल एक लाख 55 हज़ार डाकघर हैं जहाँ करीब साढ़े पाँच लाख कर्मचारी हैं.अगर डाक विभाग इस विशाल मौजूदा ढाँचे का इस्तेमाल बैंकिंग के लिए सही तरीके से करता है तो इससे लोगों, ख़ासकर लाखों ग्रामीणों को काफ़ी फ़ायदा पहुँच सकता है.हालांकि इसमें गाँवों तक इंटरनेट पहुँचाने समेत कई चुनौतियाँ भी होंगी.
ग्रामीण इलाक़ों में डाकघर की सार्थकता बनी हुई है पर मोबाइल वगैरह के आने से कई जगह डाकघर पर निर्भरता कम हो रही है.
बदली हुई परिस्थितियों को देखते हुए भारत सरकार डाकघरों को नए रूप में पेश करने की योजना बना रही है. योजना ये है कि डाकघर अपने मूल काम के अलावा बैंकों के तौर पर भी काम करे.
संचार मंत्रालाय में राज्य मंत्री सचिन पायलट इस योजना और इसकी मंशा के बारे में विस्तार से बताते हैं, "चिट्ठी वगैरह भेजने से डाक विभाग को आय होती थी वो कम हो गई है.समय आ गया है कि भारतीय डाक विभाग का नवीनीकरण किया जाए ताकि डाक विभाग की आमदनी बढ़े और बैंकिंग के सेवा उन लोगों तक पहुँच पाए जो अब तक इससे वंचित हैं."अगर मंत्रालय को बैंक शुरु करने के लिए रिज़र्व बैंक से बैंकिंग लाइसेंस मिल जाता है तो योजना को कैबिनेट के पास भेजा जाएगा.
योजना मंज़ूर होने की सूरत में भारतीय डाक विभाग भारत के सबसे बड़े बैंकों में से एक बन सकता है. लेकिन सवाल ये है कि गाँव-कस्बों में रहने वाले लोगों का इससे क्या मूलभूत फ़ायदे होंगे.
सचिन पायलट बताते हैं, "भारत में साढ़े छह लाख गाँवों में से पाँच फ़ीसदी में ही बैंकों की शाखाएँ खुली हुई हैं. समाज के सभी वर्गों को विकासधारा में तभी शामिल किया जा सकता है जब इन इलाक़ों में बैंक खुलेंगे. ऐसे बैंक जो आसान शर्तों पर किसानों को, छोटे उद्योगपतियों, विद्यार्थियों को ऋण मुहैया करा सके. इन लोगों को अब तक ये सुविधा नहीं मिल पाई है. अगर हमें बैंक लाइसेंस मिलता है तो ये सब काम हम कर पाएँगे."
भारत में कुल एक लाख 55 हज़ार डाकघर हैं जहाँ करीब साढ़े पाँच लाख कर्मचारी हैं.अगर डाक विभाग इस विशाल मौजूदा ढाँचे का इस्तेमाल बैंकिंग के लिए सही तरीके से करता है तो इससे लोगों, ख़ासकर लाखों ग्रामीणों को काफ़ी फ़ायदा पहुँच सकता है.हालांकि इसमें गाँवों तक इंटरनेट पहुँचाने समेत कई चुनौतियाँ भी होंगी.
जन सुनवाई में आरडब्लूए प्रतिनिधियों के साथ कई लोग विरोध दर्ज कराने पहुंचे। उन्होंने कहा कि हम इस जन सुनवाई का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि हमें तैयारी के लिए पूरा वक्त नहीं दिया गया। 1 जुलाई तक हमें अपनी आपत्तियां देनी थीं, जबकि तब तक बिजली कंपनियों ने हमारे सवालों का जवाब नहीं दिया था। ऐसे में हम किस तरह फैक्ट्स सामने रखते। डीईआरसी चेयरमैन ने उन्हें आश्वासन दिया कि बिजली कंपनियां हर सवाल का जवाब देंगी, जिसके बाद जन सुनवाई शुरू हुई।
डीईआरसी ने पावर परचेज कॉस्ट पर स्टाफ पेपर प्रकाशित किया था। इस पर जनता से राय मांगी गई थी। बिजली कंपनियों की मांग है कि हर तीन या चार महीने में बिजली बिल के साथ फ्यूल सरचार्ज भी जोड़ कर दिया जाए, क्योंकि हमें फ्यूल की कीमत तुरंत अदा करनी पड़ती है।
ग्रेटर कैलाश-1 आरडब्ल्यूए के प्रतिनिधि राजीव काकरिया ने कहा कि बिजली कंपनियां फ्यूल सरचार्ज ऐसे ही नहीं लगा सकतीं। अगर फ्यूल की कीमत बढ़ रही है, तो बहुत सी ऐसी चीजें होंगी, जिनकी कीमत कम हो रही हो। ऐसे में फ्यूल सरचार्ज लेने का क्या मतलब जब किसी चीज की कीमत कम होने पर बिजली बिल कम नहीं होता है। उन्होंने कहा कि प्रोडक्शन कॉस्ट में फ्यूल का कंपोनेंट 5 पर्सेंट से भी कम है। इसके साथ ही दिल्ली को हाइडल पावर (पानी से बनने वाली बिजली) दिलाने की कोशिश क्यों नहीं की जाती। अभी दिल्ली में बिजली की जितनी खपत हो रही है उसका 30 पर्सेंट ही हाइडल पावर है।
एक्टिविस्ट ए. के. दत्ता ने कहा कि फ्यूल में गैस के अलावा कोयला भी है। बिजली कंपनियां अपने अकाउंट में दिखाती हैं कि कोयला 1 टन चला और उन तक 700 किलो पहुंचा। इसका कोई ऑडिट क्यों नहीं होता। कंपनियां किस स्तर का कोयला खरीद रही हैं इसके लिए भी कोई ऑडिट नहीं किया जाता।
ये डबल डिप मंदी जैसे हालात हैं। डबल डिप मंदी, मंदी का वह रूप है, जिसका दोहराव कम समय के अंतराल पर होता है। जानकारों के मुताबिक आज ऐसे हालात 2008 की मंदी के कारण बने हैं और इस बार भी इसकी जड़ में अमेरिका और यूरोप के कुछ देश हैं।
दो हफ्ते में अमेरिका के बाजार से 4.5 ट्रिलियन डॉलर यानि करीब 200 लाख करोड़ रुपये हवा हो गए हैं। अमेरिका के कर्ज का भार करीब 10 ट्रिलियन डॉलर यानि 450 लाख करोड़ रुपये के आसपास है और अमेरिका को और कर्ज चाहिए। यूरोप में स्पेन, पौलेंड और इटली दिवालिया होने की कगार पर हैं।
पहले और अब मंदी के खतरे में फर्क है। पहले नौकरियां और कारोबार बचाने के लिए सरकारें पैसा झोंकने को तैयार थीं, लेकिन अब सरकारें खुद इस लायक नहीं हैं कि वह मंदी को रोकने के लिए कोई दीवार खड़ी कर सकें।
एजेंसी ने अमेरिका की क्रेडिट रेटिंग को ‘एएए’ से घटाकर ‘एएप्लस’ कर दिया है। माना जा रहा है कि इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था के प्रति निवेशकों का भरोसा घटेगा।
मुखर्जी ने कहा, हमें इसका विश्लेषण करना होगा। इसमें कुछ समय लगेगा। स्थिति गंभीर है और बिना किसी आधार के टिप्पणी करने का कोई फायदा नहीं है। एशिया समेत वैश्विक शेयर बाजारों में भारी गिरावट आने के एक दिन बाद अब अमेरिका की ऋण साख घटने की स्थिति सामने आई है। बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स शुक्रवार को एक समय 700 से अधिक अंक नीचे आ गया था।
वित्तमंत्री ने शेयर बाजारों में गिरावट के बारे में शुक्रवार को कहा था कि यह स्थिति वैश्विक कारणों की वजह से बनी है। इसका घरेलू स्थिति से कोई लेनादेना नहीं है। वहीं बाजार नियामक सेबी ने कहा था कि उसकी स्थिति पर निगाह है। सेबी के चेयरमैन यूके सिन्हा ने कहा, हमारी जोखिम प्रबंधन प्रणाली बेहतर तरीके से काम कर रही है।
क्रेडिट रेटिंग में कटौती वाशिंगटन में हाल ही में कर्ज की सीमा बढ़ाए जाने को लेकर सरकारी जद्दोजहद के बाद की गई है। लेकिन अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि स्टैंडर्ड एंड पूअर्स के ये नतीजे गलत हैं।
इस बीच, अमेरिका और यूरोप के शेयर बाजारों में गिरावट का दौर जारी है। भारत में भी शुक्रवार को शेयर बाजार एक बार 17हजार से भी नीचे चला गया था और आखिर में 387.31 की गिरावट के साथ बंद हुआ।
अक्सर ऐसा देखा जाता है कि मोबाइल कंपनियां, बिना ग्राहकों की अनुमति के ही कॉलर ट्यून या अन्य तरह की वैल्यू एडेड सेवाओं चालू कर देती हैं। लेकिन अब टेलीकॉम कंपनियों के लिए ऐसा करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। क्योंकि टेलीकॉम रेग्युलेटर ट्राई ने यह साफ कर दिया है कि किसी भी तरह के वैल्यू एडेड सर्विस को एक्टिवेट करने के 24 घंटे के भीतर अगर टेलीकॉम कंपनी ग्राहक से अनुमति नहीं लेती है तो उस सर्विस के एवज में वसूले गए पैसे ग्राहकों के लौटाने होंगे।
आपको बता दें कि ट्राई को लगातार ग्राहकों से यह शिकायत मिल रही थी कि टेलीकॉम कंपनियां बिना उनकी इजाजत लिए ही वैल्यू एडेड सेवाओं को शुरू कर देती हैं और अकाउंट के पैसे काट लिए जाते हैं। 1 अप्रैल 2010 से लेकर 31 मार्च 2011 के बीच ट्राई को 672 लोगों ने ऐसी शिकायतें भेजी हैं जिसके बाद ट्राई ने यह नया निमय बनाया है।
अमेरिकी कृषि विभाग के ताजा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 31.1 करोड़ की आबादी में से 4.6 करोड़ लोग सरकारी खाद्यान्न योजना पर निर्भर हैं। यह विभाग आधिकारिक तौर पर पूरक पोषाहार सहायता कार्यक्रम का संचालन करता है।
बताया जा रहा है कि उच्च बेरोजगारी दर और अमेरिकी अर्थव्यवस्था की कमजोर हालत के चलते इस कार्यक्रम के तहत लाभार्थियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अक्टूबर 2007 में अमेरिका में इस कार्यक्रम के तहत केवल 2.7 करोड़ लोगों को खाद्यान्न सुरक्षा मुहैया करवाई जा रही थी। मगर आज यह संख्या बढ़रकर 4.6 करोड़ के स्तर पर जा पहुंची है। और कहा जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह आंकड़ा और तेजी से बढ़ सकता है।



