- Chammak Challo Akon, Hamsika Iyer
- Dildaara (Stand By Me) Shafqat Amanat, Vishal, Shekhar, Clinton
- Criminal Akon, Vishal Dadlani, Shuruti Pathak
- Bhare Naina Shekhar Ravjani, Nandini Srikar, Vishal Dadlani
- Right By Your Side Sidd Coutto
- Raftaarein Vishal Dadlani
- Jiya Mora Ghabraaye (The Chase) Sukhwinder Singh, Vishal
- Chammak Challo (Remix - Abhijit Vaghani) Akon, Hamsika Iyer
- Comes The Light (Theme) Theme
- I'm On (Theme) Theme
- Song Of The End (Theme) Theme
- Chammak Challo (Remix - DJ Khushi) Akon, Hamsika Iyer
- Criminal (Remix) Akon, Vishal Dadlani, Shuruti Pathak
- Chammak Challo (International Version) Akon
- Chammak Challo (Remix - DJ A-myth) Hamsika Iyer, Akon
गरीब बच्चों को फ्री एजुकेशन देने की मुहिम में लगी स्माइल फाउंडेशन ने अपनी बात को आम आदमी तक पहुंचाने के मकसद से डाक्युमेंट्री की बजाय फीचर इस फिल्म को बनाने का फैसला किया। शायद पहली किसी एनजीओ ने अपने दमखम पर फिल्म बनाकर उसे सिनेमाघरों तक पहुंचाने का काम किया है। बॉक्स ऑफिस पर बिकाऊ स्टार्स की गैर मौजूदगी में बनी इस फिल्म आई एम कलाम में ऐसा कोई मसाला मौजूद नहीं, जो दर्शकों की बहुत बड़ी क्लास को सिनेमाघरों तक खींचने का दम रखता हो। लेकिन इसमें ऐसा बहुत कुछ है, जो आपने इससे पहले किसी हिंदी फिल्म में शायद ही देखा हो।
आंबेडकर नगर बस्ती के हर्ष मायर को इस फिल्म में अब्दुल कलाम की भूमिका निभाने के बाद नैशनल अवॉर्ड मिला। रिलीज से पहले दुनिया के कई नामी फिल्म समारोहों में इसे मिले दर्जनभर अवॉर्ड इसे खास क्लास का फिल्म बनाते हैं। बरसों से हिंदी फिल्मों में बैडमैन की इमेज बना चुके गुलशन ग्रोवर का इसके लिए फीस न लेना और महीनों से इसके प्रचार के साथ जुड़े रहना इस फिल्म को खास बनाता है। आज जब हिंदी सिनेमा में एक्सपेरिमेंट के नाम पर ये साली जिंदगी से लेकर डेल्ही बैली जैसी हॉट फिल्में बन रही हैं, ऐसे में सिल्वर स्क्रीन पर आई एम कलाम का आना तपती धूप के बीच ठंडी हवा के झोंके से कम नहीं है।
कहानी: गरीबी के बावजूद छोटू अपनी दुनिया में मस्त है। उसने मुश्किल हालात में घुटने टेकने की बजाय उनसे लड़ना सीख लिया है। उसकी मां उसे अपने दूर के रिश्तेदार भाटी के ढाबे पर काम करने के लिए छोड़ देती है, ताकि उसकी कमाई से वह घर चला सके। इसी ढाबे पर पहले से काम कर रहा लपटन कोई न बहाना बनाकर छोटू को डांटता रहता है। इन सबसे बेपरवाह छोटू का ख्वाब है पढ़-लिखकर बड़ा आदमी बनना। छोटू ढाबे पर अपनी किताबें भी लाया है। रोज काम पूरा होने के बाद वह इन्हीं किताबों में खो जाता है। एक दिन ढाबे पर लगे टीवी पर छोटू राष्ट्रपति ए. पी. जे. कलाम के साथ स्कूली बच्चों की मुलाकात देखता है। उसे पता चलता है कि राष्ट्रपति का बचपन भी गरीबी और अभावों में गुजरा है, इसके बाद वह अपना सपना पूरा करने की ठान लेता है। ढाबे पर हर कोई उसे छोटू नाम से बुलाता है और इसी नाम से छुटकारा पाने के लिए वह अपना नाम कलाम रख लेता है। ढाबे के पास राजी जी की एक बड़ी कोठी के एक हिस्से में होटेल बना हुआ है। यहां ठहरे मेहमानों को चाय सप्लाई करने के दौरान कलाम की मुलाकात राजा साहब के दस-बारह साल के बेटे कुंअर रणविजय से होती है जिसे महल में हर कोई प्रिंस कहता है। अपने रूम में अकेले रहने वाला प्रिंस और कलाम छुप-छुप मिलने लगते हैं और अच्छे दोस्त बन जाते हैं। प्रिंस को जब कलाम के पढ़ने के जुनून का पता चलता है तो वह उसे अपनी कुछ किताबें दे देता है। लेकिन एक दिन कलाम जब प्रिंस के रूम में दीवार फांदकर जा रहा होता है तो उसे होटेल स्टाफ पकड़ लेता है। इसके बाद भाटी उसे ढाबे से निकाल देता है जिस पर वह दिल्ली जाकर राष्ट्रपति कलाम को अपनी चिट्ठी देने का फैसला करता है।
ऐक्टिंग: फिल्म के लीड रोल में हर्ष की ऐक्टिंग जबर्दस्त है। उसने अपने अभिनय के दम पर छोटू के करेक्टर को पर्दे पर जीवंत किया है। वहीं, प्रिंस के रोल में हसन साद और लपटन की भूमिका में पितोबाश त्रिपाठी जमे हैं। भाटी के रोल में गुलशन ग्रोवर का नया और बदला-बदला किरदार इस फिल्म का एक और सशक्त पक्ष है।
डायरेक्शन: नीला माधव पांडा ने बीकानेर की रेतीली लोकेशन पर सीमित साधनों में अच्छी फिल्म बनाई है। वहीं, दिल्ली में छोटू और प्रिंस की मुलाकात के बाद यकायक भाटी के ढाबे से स्कूल जाते कलाम का सीन दिखाकर फिल्म खत्म करना समझ से परे है। अपने दमखम पर बड़ा आदमी बनने का सपना देखने वाला छोटू फिल्म के क्लाईमेक्स में प्रिंस की दोस्ती के एहसानों तले दबा नजर आता है।
संगीत: फिल्म के माहौल पर म्यूजिक फिट है , लेकिन डेढ़ घंटे के करीब की फिल्म में गानों को फिट करना कहीं न कहीं फिल्म की चाल कम करता है।
क्यों देखें : देशभर के होटेलों में हर रोज चाय सप्लाई करने वाले अपनी पहचान खोकर छोटू बन चुके हजारों बच्चों के बीच अपनी अलग पहचान बनाते छोटू के संघर्ष और उसका हार ना मानने का जज्बा फिल्म की खासियत है।