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नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार को यहां के द्वारका इलाके में चुनावी रैली की। आप और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मोदी ने कहा, '' दोनों सुबह उठकर तय करते हैं कि आज कौन-सा झूठ बोलें, ताकि सनसनी मचे। झूठे वादे करने और झूठ बोलने की प्रतिस्पर्धा हो रही है। इस चुनाव में झूठ का जितना सहारा लिया जा रहा है, उतना कभी नहीं हुआ। टीवी में जगह बनाने के लिए सरकार नहीं चलानी होती, सरकार चलानी होती है लोगों के दिलों में जगह बनाने के लिए।''
मोदी ने यह भी कहा, ''आपने जो दिया है, विकास करके लौटाना है। यहां की समस्या को दूर करने लौटाना है। इसलिए मुझे आप सेवा करने का मौका दिया। दिल्ली को संवेदनशील सरकार की जरूरत है। दिल्ली में यहां की धरती से जुड़े लोगों की जरूरत हैं। ऐसे लोगों की जरूरतें हैं, जिन्होंने दिल्ली के सामान्य लोगों की सेवा में जिंदगी बिताई है।'' मोदी ने जनता से पूर्ण बहुमत वाली बीजेपी सरकार बनाने की अपील करते हुए कहा, '' इस बार गलती से भी आधा-अधूरा मत करना। दिल्ली का एक साल बिगड़ गया। दिल्ली पच्चीस साल पिछड़ गया। दिल्ली को आगे बढ़ाना है तो पूर्ण बहुमत वाली बीजेपी सरकार लानी होगी।'' मोदी ने दिल्ली में गरीबों को झुग्गियों की जगह पक्के मकान देने और पानी, बिजली और शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी करने का भी वादा किया।
पेट्रोल-डीजल की कम होती कीमतों का श्रेय लिया
मोदी ने पेट्रोल-डीजल की कम होती कीमतों का श्रेय भी लिया और विरोधियों पर निशाना भी साधा। मोदी ने कहा, ''मेरी आलोचना करने वाले कहते हैं कि यह मोदी का नसीब है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम हो रही हैं। मैं कहता हूं कि अगर नसीब से पैसा बचता है तो बदनसीब की क्या जरूरत है? मेरे नसीब से पेट्रोल और डीजल सस्ता हुआ है तो हर्जा क्या है?'' बता दें कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की गिरती कीमतों की वजह से पेट्रोल और डीजल की कीमत में आई कमी का बीजेपी और मोदी द्वारा श्रेय लेने की वजह से विपक्षी पार्टियां निशाना साधती रही हैं। मोदी ने कहा कि लोगों ने उनकी यह कहकर आलोचना की कि उन्हें विदेश नीति की समझ नहीं है। मोदी बोले, ''ये मैं भली-भांति जानता हूं कि विश्व में भारत का लोहा कैसे मनवाया जाए, क्योंकि मैं अपने देश को जानता हूं।'' मोदी ने यह भी कहा, ''मैंने विकास के एजेंडे पर चुनाव लड़ा है, मैं सरकार भी इसी एजेंडे पर चलाता हूं। सभी समस्याओं का विकास ही इलाज है।''
पानी की समस्या दूर हुई: मोदी
मोदी ने कहा, ''मैं असली द्वारका वाला हूं, पर अब असली दिल्लीवासी हो गया हूं। आपको याद होगा कि पिछले चुनाव में मैं यहां आया था और उस समय मैंने आपकी पानी की समस्या का जिक्र किया था। सामान्य तौर पर, राजनीतिज्ञों द्वारा वादे करना और वादे भुला देने की एक परंपरा बन गई है। लेकिन आपको याद दिलाता हूं कि मैंने यहीं द्वारका में आपसे पानी की समस्या की चर्चा की थी। आपने जैसे ही हमने सेवा का मौका दिया और हरियाणा में बीजेपी की सरकार बनी तो आपकी पानी की समस्या को खत्म किया। एक समय था, जब दिल्ली और हरियाणा में कांग्रेस की सरकार थी। हरियाणा की सरकार किसानों को और दिल्ली की सरकार यहां की जनता को पानी के मुद्दे पर एक-दूसरे के खिलाफ भड़काती थी। इस तरह की राजनीति कांग्रेस करती रही है।'' मोदी ने यह भी कहा कि इतने सालों में देश में गरीबी इसलिए नहीं मिटी, क्योंकि देश की गरीबी में ही राजनीति की सलामती है। इन लोगों को आपके जीवन की सलामती की चिंता नहीं है।
कल भी साधा था आप और कांग्रेस पर निशाना
इससे पहले, मोदी शनिवार को पूर्वी दिल्ली के कड़कड़डूमा में हुई रैली को संबोधित करने पहुंचे थे। यहां मोदी ने आम आदमी पार्टी और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा था। पीएम मोदी ने आम आदमी पार्टी का नाम लिए बिना कहा कि मुफ्त चीजों का वादा करने वालों और झूठ बोलने वालों से बचें। बता दें कि दिल्ली विधानसभा चुनावों के लिए पीएम मोदी की चार रैलियां प्रस्तावित हैं। द्वारका में मोदी की यह दूसरी रैली है। इस रैली के लिए सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त किए गए थे।
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दिल्ली: कांग्रेस से एक और पूर्व मंत्री ने साथ छोड़ दिया। यूपीए सरकार में पर्यावरण मंत्री रहीं जयंती नटराजन ने कांग्रेस छोड़ दी है। उनके द्वारा सोनिया गांधी को लिखा लेटर मीडिया में आने के बाद शुक्रवार दोपहर उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र की कमी की बात भी उठाई
जयंती नटराजन ने कहा, 'मैंने पार्टी की हर बात मानी, मगर मुझे क्यों हटाया गया था, कुछ पता नहीं। अभी मेरा किसी और पार्टी को जॉइन करने का इरादा नहीं है।' कांग्रेस हाई कमान पर हमला करते हुए जयंती ने कहा कि राज्य कांग्रेस से कोई विवाद नहीं। समस्या हाई कमान से है। मुझे मैडम सोनिया गांधी से मिलने का वक्त नहीं दिया गया
रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में ही जयंती ने कांग्रेस से अपने रिश्ते की बात कही। उन्होंने कहा कि मेरे लिए ये दर्द भले पल हैं क्योंकि मेरा परिवार कांग्रेस के साथ इसके गठन के वक्त से है। हालांकि उन्होंने यह कहते देर नहीं लगाई कि अब वक्त आ गया है जब मुझे कांग्रेस से जुड़े होने पर पुनर्विचार करना पड़ेगा। यह कांग्रेस वह नहीं है, जिसके साथ मैं जुड़ी थी।
पर्यावरण मंत्री के पद से हटाए जाने पर जयंती ने बोला, मैंने मंत्री के रूप में हर कदम कानून के मुताबिक और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए उठाया। मैंने अपना काम पूरी ईमानदारी से किया।' इसके अलावा 'कांग्रेस उपाध्यक्ष के ऑफिस ने भी कहा कि बड़े प्रॉजेक्ट्स की वजह से पर्यावरण का नुकसान नहीं होना चाहिए। पार्टी का भी यही रुख था। ऐसे में मैंने यही किया।'
जयंती ने कहा कि पार्टी लाइन पर चलने के बावजूद मुझे मंत्री पद से इस्तीफा क्यों दिलवाया गया, यह मुझे आज तक समझ में नहीं आया। 'जब मैंने इस्तीफा दिया था, प्रधानमंत्री ने मेरे काम की तारीफ की थी। कोई गलती या कमी नहीं गिनाई गई थी।'
लोकसभा चुनाव के पहले नरेंद्र मोदी ने पर्यावरण मंत्रालय को लेकर 'जयंती टैक्स' कहकर तंज कसा था। इस पर जयंती नटराजन ने कहा, 'पीएम मोदी ने 'जयंती टैक्स' की बात की थी। अब वह सरकार में हैं, इसकी जांच करवा लें। मैं इसका स्वागत करती हूं।' सोनिया गांधी ने प्रणब मुखर्जी और पी चिदंबरम को निर्देश दिया है कि इस मामले को जल्द ही निपटारा किया जाए. इस सिलसिले में सोनिया गांधी ने गुरुवार सुबह प्रणब मुखर्जी और ए के एंटनी से मुलाकात की थी।
प्रणब के लिखे नोट ने बढ़ाई सरकार की चिंता
सूत्रों की माने तो प्रणब मुखर्जी ने पी चिदंबरम के साथ साझा प्रेस कांफ्रेंस करने से इनकार कर दिया. जिसकी वजह से सरकार और कांग्रेस पार्टी की मुश्किलें और बढ़ गईं हैं.
चिदंबरम-प्रणब के बीच मतभेद को खत्म करने के लिए नारायण सामी ने गृहमंत्री से मुलाकात की थी.कांग्रेस अध्यक्षा द्वारा दिए गए इस निर्देश को सरकार को मुश्किलों से उबारने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है.
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2जी केस में कोई घोटाला नहीं: मनु सिंघवी
गौरतलब है कि प्रणब मुखर्जी के उस बयान ने पी चिदंबरम की मुश्किलें और बढ़ा दी थीं जिसमें उन्होंने कहा था कि आरटीआई के इस्तेमाल के बाद सामने आए दस्तावेज को सिर्फ वित्त मंत्रालय द्वारा नहीं बना गया था. इस पर सरकार के अन्य मंत्रालयों की भी सहमति थी। दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट ने 2जी केस की सुनवाई को 10 अक्टूबर तक मुल्तवी कर दिया है. जिसके बाद सरकार ने राहत की सांस ली है।
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मुखर्जी ने सोनिया के निवास 10 जनपथ पर उन्हें इस मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। वह कांग्रेस अध्यक्ष और प्रधानमंत्री मनमोहन को एक पत्र लिखकर पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि सूचना के अधिकार के जरिए सामने आया नोट अकेले वित्त मंत्रालय ने नहीं बल्कि प्रधानमंत्री कार्यालय सहित विभिन्न मंत्रालयों की ओर से तैयार किया गया था।
प्रणब की पिछले चार दिन में सोनिया गांधी से यह दूसरी मुलाकात है। इस बैठक के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल भी मौजूद थे। सोनिया ने इस मसले पर रक्षामंत्री एके एंटनी से भी विचार विमर्श किया।
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वित्त मंत्रालय के नोट को लेकर सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियों के बीच तनातनी को दूर करने के लिए कांग्रेस और सरकार में माथापच्ची का दौर पिछले कई दिनो से जारी है। मुखर्जी के साथ बुधवार देर रात प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री वी नारायणसामी, संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल और संसदीय कार्य राज्य मंत्री राजीव शुक्ला ने बातचीत की थी।विपक्ष वित्त मंत्रालय के नोट को लेकर सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियों के बीच मनमुटाव को भुनाने में लगा है। इसे देखते हुए सरकार और पार्टी में यह कोशिश चल रही है कि मुखर्जी और चिदंबरम संयुक्त संवाददाता सम्मेलन करें जिससे लोगों में यह संदेश जाए कि सरकार में पूरी एकजुटता है।
विवाद का विषय बना नोट गत 25 मार्च को वित्त मंत्रालय के उप निदेशक पीजीसी राव ने प्रधानमंत्री कार्यालय की संयुक्त सचिव विनी महाजन को भेजा था, जिसमें कहा गया था कि तत्कालीन वित्त मंत्री के रुप में चिदम्बरम यदि चाहते तो 2जी घोटाला रोका जा सकता था। नोट के अनुसार चिदम्बरम के पास पर्याप्त समय था कि वह कौड़ियों के भाव स्पेक्ट्रम आवंटन का काम रोक सकें। इस नोट को जनता पार्टी अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी ने अन्य दस्तावेजों के साथ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया है तथा विपक्षी दलों ने इसी आधार पर चिदम्बरम के इस्तीफे या बर्खास्तगी की मांग की है।
समझा जाता है कि मुखर्जी ने अपने पत्र में कहा है कि शुरुआत में वित्त मंत्रालय ने इस प्रकरण पर 12 पैराग्राफ का एक पत्र कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद तैयार किया था। कैबिनेट सचिव ने वित्त मंत्रालय के उक्त पत्र में 14 और पैराग्राफ जोड़कर इसे वापस भेजा था।
उन्होंने कहा कि 2जी विवाद पर सरकार के मंत्रालयों के दस अलग-अलग ब्योरे थे तथा वित्त मंत्रालय एक ही व्यापक और समन्वित नोट तैयार करना चाहता था। बाद में ऐसा नोट राव ने तैयार किया था जिस पर लिखा था कि मुखर्जी ने इसे देखा है।
2जी मसले पर सोनिया से मिले प्रणब - Desh - LiveHindustan.com
सोनिया की नजर में वे आसानी से हर बात मान लेने वाले सिपहसालार थे, जिनसे हर उल्टा सीधा काम कराया जा सकता था और जरूरत पङने पर बगैर किसी परेशानी के हटाया जा सकता था. लिहाजा उन्होंने धैर्य रखना बेहतर समझा, राहुल को भारतीय राजनीति की आंच में पकने का मौका दिया. मगर अब वे बेसब्री से इंतजार कर रही हैं कि मनमोहन चुपचाप अपनी कुरसी राहुल बाबा को ऑफर कर दें, मगर मनमोहन दांव पर दांव खेल रहे हैं. राहुल की राह में कांटे बो रहे हैं और खाइयां खुदवा रहे हैं. हालांकि कसूरवार अकेले मनमोहन नहीं हैं. वे सचमुच कुछ हद तक इमानदार हैं और पैसे से अधिक पद की महत्वाकांक्षा रखते हैं. सच तो यह है कि इन दिनों उनके दिल में शूल चुभा है और आंखों में खून भरा है.
रबर स्टैंप की कुंठाएं
उन्हें जितनी बार कमजोर या रिमोट से चलने वाला खिलौना कहा जाता है, वे उतनी दफा कमस खाते होंगे कि उन्हें कांग्रेस की मलिका से और इस पूरी पार्टी से अपने तमाम अपमानों का बदला लेना है. जिसने कभी उनकी काबिलियत को तरजीह नहीं दी, हमेशा उन्हें मोहरा समझा. उनसे भ्रष्टाचार करवाया और लोगों के आक्रोश को झेलने के लिए आगे खड़ा कर दिया. उन्हें इस बात का भी गुस्सा है कि कोई दिग्विजय कभी भी कह देता है कि अब राहुल पीएम बनने के लिए तैयार हैं. और तो और कांग्रेस की पूरी की पूरी लॉबी बेशर्मी के साथ इंतजार कर रही है कि इसी भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मनमोहन निबट जायें और राहुल की ताजपोशी हो जाये, मगर जिस तरह अन्ना के आंदोलन के बावजूद सरकार बची रह गयी, वे हाथ मल रहे होंगे.
दरअसल सोनिया ने मनमोहन को कुरसी सौंपी तो उन्हें लगा कि सोनिया ने उन पर बहुत बड़ा एहसान किया है. जीवन के किसी दौर में उन्होंने यह सपना नहीं देखा होगा कि वे देश के प्रधानमंत्री भी बन सकते हैं. ब्यूरोक्रेट मनमोहन ने कुछ समय तक खुद को कांग्रेस की राजनीति के अनुरूप ढालने की जबरदस्त कोशिशें कीं. हर सार्वजनिक मंच पर सोनिया के कुनबे के आगे शीश नबाकर, हर एक फैसला उनसे पूछ कर, चुपचाप रह कर, प्रधानमंत्री होने के प्रभाव को चेहरे पर लाये बगैर... मगर धीरे-धीरे उन्हें समझ आने लगा कि सोनिया ने उनके साथ कोई एहसान नहीं किया है. वे उसे मोहरा बनाकर अपने बेटे और बेटी दोनों का भविष्य संवारने में जुटी हैं. सोनिया ने प्रियंका के लिए पैसों की बारिश कर दी और राहुल को पीएम पद के लिए तैयार कराने में जुट गयी.
यूपीए-1 जब खत्म हुआ तो यह योजना बनी कि अब राहुल को आगे किया जाये. मगर परमाणु बिल पास कराकर मनमोहन तब तक सिंह इज किंग की छवि हासिल कर चुके थे और इतना आसान नहीं था कि उनकी जगह राहुल को प्लेस कर दिया जाये. लिहाजा यूपीए-२ में भी बुझे मन से ही मनमोहन को ही कमान सौंप दी गयी, वह भी इस योजना के साथ कि अब किसी न किसी बहाने से मनमोहन को बीच में ही उतार लेना है. क्योंकि राहुल के लिए तीसरे टर्म का इंतजार करना बेवकूफा होगी. वैसे भी तीसरी बार सत्ता हासिल करना इतना आसान नहीं होता है. लिहाजा मनमोहन को नाकाम साबित करने का खेल शुरू हो गया. मगर मनमोहन ने इन हमलों को सफलता पूवर्क नाकाम करना शुरू कर दिया.
हम आज जिन घोटालों की बातें करते हैं उनमें से अधिकांश घपलों के फायदे में प्रियंका पति राबर्ट की किसी न किसी रूप में हिस्सेदारी रही है. मार्च, २०११ में बिजनेस टाइम्स ने खबर छापी कि राबर्ट अरबपति बनने वाले सबसे तेज भारतीय हैं. टूजी स्पेक्ट्रम बंदरबांट में सबसे अधिक फायदा कमाने वाली मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी यूनिटेक में उनका २० फीसदी शेयर है. कॉमनवेल्थ का सबसे अधिक ठेका हङपने वाली कंपनी डीएलएफ, जो आईपीएल की भी प्रायोजक है ने राबर्ट की कंपनियों को मामूली शर्तों पर बड़ी राशि बतौर लोन दी है. इसका अर्थ यह समझा जाना चाहिए कि यह राशि बतौर रिश्वत दी गयी है और इसकी वापसी की अपेक्षा कंपनी नहीं रखती होगी. यानि देश के सर्वाधिक चर्चित दो घोटालों से राबर्ट का नाम जुड़ा है. इसका यह अर्थ नहीं कि इन घोटालों में राबर्ट की हिस्सेदारी है बल्कि यह कि प्रियंका के परिवार को लाभ पहुंचाने के लिए ही इन दोनों घोटालों की परिकल्पना की गयी होगी.
डुएल थ्योरी
अब यहां दो तरह को थ्योरीज काम करती हैं. पहली कहती हैं कि देश के बड़े घोटालों से सोनिया परिवार के ताल्लुकात हैं, देश में फैले भ्रष्टाचार की जङ में यही परिवार है. जिसकी घोषणा सुब्रमनियम स्वामी बार-बार करते हैं और जो मनमोहन कंपनी को सूट भी करता है. मगर एक थ्योरी यह भी है कि जानबूझकर इन्हीं दो घोटालों को सामने लाया गया ताकि सोनिया परिवार की प्रतिष्ठा इतनी धूमिल कर दी जाये कि फिर उन्हें कभी सरकार बनाने का सपना न आये. एक बड़ी मीडिया कंपनी भी इस कांस्पिरेसी में टीम मनमोहन का खुलकर साथ दे रही है, चाहे कॉमनवेल्थ घोटाले की बात हो या टूजी बंदरबांट की. गाहे बगाहे सोनिया परिवार पर आक्षेप करने में भी यह पीछे नहीं रहती. चाहे राहुल को युवराज का तगमा देना हो, या वाड्रा के अचानक अरबपति बन जाने की खबर.
माहिर मनमोहन
दरअसल लाख पढ़ने के बावजूद राहुल राजनीति का एबीसीडी भी नहीं समझ पाये मगर मनमोहन एकलव्य की तरह देख-देख कर ही माहिर खिलाडी बन गये. उन्होंने न सिर्फ सोनिया के कुनबे बल्कि कांग्रेस पार्टी की जङ में मट्ठा डालने का काम शुरू कर दिया. उन्हें समझ आ चुका है कि लाख चाहें तीसरी बार कांग्रेस उन्हें पीएम नहीं बनायेगा. मगर सिंह को किंग बनने का चस्का लग गया है. संयोगवश उन्हें तीसरी बार पीएम बनने का फार्मूला भी मिल गया है.
क्या है फार्मूला
अब तक नरसिंहा राव की मुद्रा में रहने वाले मनमोहन अचानक चुनाव से पहले बीपी सिंह की मुद्रा अख्तियार कर लेंगे और सोनिया के कुनबा पर प्रहार शुरू कर देंगे. कांग्रेस छोङ देंगे. लिहाजा सोनिया का कुनबा एक बार फिर भ्रष्टाचार के आरोप में घिर कर जनमानस के बीच अपनी बेहतर छवि गंवा बैठेगा. टीम मनमोहन ने गुपचुप तरीके से अपनी टीम बनानी भी शुरू कर दी है. नीतीश, नायडू और दूसरे कई दिग्गज इस टीम में हो सकते हैं. इंतजार कीजिये, दिलचस्प मोङ लेगी भारतीय राजनीति.
(सभार विस्फोट)
सोनिया गांधी की अज्ञात बीमारी और फिर ऑपरेशन को गुप्त रखने में कांग्रेस पूरी तरह नाकाम साबित हुई। ये कांग्रेस के सफल मीडिया मैनेजमेंट का जीता जागता उदाहरण है। मैमोरियल स्नोल कैटरिंग कैंसर सेंटर में ऑपरेशन कराने के बाद सोनिया गाँधी अपने कुनबे के साथ न्यूयॉर्क के प्लस मैनहैट्टन अपॉर्टमेंट में रह रही हैं। इस अपार्टमेंट में रहने का हर रोज का खर्च 18 लाख रुपए का है।
जनता पार्टी अध्यक्ष और पूर्व सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की मानें तो सोनिया गांधी और उनके कुनबे पर रोजाना 40 हजार डॉलर खर्च किए जा रहे हैं। स्वामी ने सोनिया गांधी पर हो रहे खर्च को लेकर ट्विटर पर सवाल खड़े किए हैं।
ये वही सोनिया गांधी हैं जो दाल रोटी की बढ़ती कीमतों पर चिंता जताती हैं और मनमोहन सिंह को दामों पर काबू करने के लिए चिट्ठी लिखती हैं। ये वही सोनिया गांधीं हैं जिन्होंने शशि थरूर की मंत्रिमंडल से इसलिए छुट्टी कर दी कि वो इक्नॉमिक क्लास को कैटल क्लास कहते थे।

