अन्ना हजारे के आंदोलन से निपटने में जुटी कांग्रेस की परेशानी और बढ़ने के आसार हैं। पार्टी ने अन्ना और उनके आंदोलन पर निशाना साधना जारी रखा है और उनके आंदोलन को 'सांप्रदायिक' राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और औद्योगिक घरानों द्वारा समर्थित बताया है।
पार्टी ने पहले सवाल उठाया था कि अन्ना के आंदोलन के पीछे अमेरिका है, लेकिन इस आरोप को वापस लेते हुए अब आरएसएस के 'गुप्त समर्थन' की बात कही है। पार्टी प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा, 'आरएसएस और वीएचपी (विश्व हिंदू परिषद) इस आंदोलन के पीछे हो सकते हैं और भाजपा इसका राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है।'
पार्टी के दूसरे नेता भी अन्ना के आंदोलन को आरएसएस से जोड़ रहे हैं। उनका आरोप है कि हजारे को भाजपा शासित राज्यों से पैसे मिल रहे हैं, खास कर गुजरात और मध्य प्रदेश से। नेताओं का यह भी कहना है कि हिंदुत्व के मुद्दे पर जुड़े एनआरआई भी अन्ना के आंदोलन के साथ हैं। कांगेस के एक वरिष्ठ नेता ने तो यहां तक कहा कि इस आंदोलन में मुस्लिमों की गैरमौजूदगी से भी उनकी बात को बल मिलता है। उन्होंने सवाल किया, 'आखिर मुस्लिम आंदोलन से दूर क्यों हैं?
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