राहुल ने क्यों पकड़ी पूणे की राह
अन्ना के आगे सरकार ने घुटने टेक दिए हैं... कांग्रेस के वो नेता जो आम आदमी के रहनुमा बनते थे... आम आदमी का साथ देने का दम भरते हैं न वो नजर आए और न ही उनका कोई बयान आया... लगा कि उन्हें देश में जो हो रहा है उससे कोई लेना देना ही नहीं है।
राहुल को याद आए अन्ना
अन्ना को तिहाड़ से रिहा करने का सरकार ने मन बनाया तो इसका क्रेडिट भी उन्हें ही दिया जाने लगा...बताया गया कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के साथ चर्चा की और अन्ना को रिहा करने को कहा। दोपहर भर गृहमंत्री अन्ना के बारे में जानकारी होने से इनकार कर रहे थे और कुछ ही घंटों में रिहाई का फैसला कर लिया गया।
उल्टी पड़ी कांग्रेस की चाल
साफ है कि सरकार को अपनी गलती का अहसास हो चुका था। आनन फानन में अन्ना की रिहाई का आदेश तिहाड़ जेल भेज दिया गया और इसका क्रेडिट राहुल गांधी को दिया गया। ऐसा दिखाने की कोशिश की गई कि राहुल को ये पता ही नहीं था कि अन्ना के साथ क्या हो रहा है और जैसे ही उन्हें पता चला उन्होंने अन्ना को जेल से रिहा करने को कह दिया। अन्ना भी तैयार थे उन्होंने कांग्रेस और सरकार की इस चाल को नाकाम कर दिया।
अन्ना ने जेल से बाहर आने किया इनकार
अन्ना ने जेल से बाहर आने से ही इनकार कर दिया और इस तरह कांग्रेस की ये चाल भी उल्टी पड़ गई... अब उसके लिए एक तरफ कुंआ और दूसरी तरफ खाई वाले हालात पैदा हो गए।
सड़क से लेकर संसद तक फजीहत
सड़क से लेकर संसद तक फजीहत हुई सो अलग। पीएम को संसद में सफाई देनी पड़ी... विपक्ष ने सरकार को खूब खरी खोटी सुनाई और सरकार अन्ना के आगे घुटने टेकती नजर आई... राहुल गांधी को एक बार फिर किसानों की याद आई और उन्होंने पुणे की राह पकड़ ली।
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