इसे पहनने पर दिमाग के उन हिस्सों में करंट भेजा जाता है जो कुछ सीखने में मदद करते हैं। हालांकि यह करंट 1 एम्पियर (करंट का यूनिट) के एक हजारवें हिस्से से भी कम होता है।
शोधकर्ताओं ने 15 लोगों को टोपी पहनाई। उन्हें बटन का एक सेट दिया। जैसे पियानो बजाते समय बटन दबाते हैं, वैसे ही उन बटन को तीन अलग-अलग तरीकों से दबाने को कहा गया। इस दौरान टोपी से दिमाग में हल्का करंट भेजा गया। यह प्रक्रिया दस मिनट तक चली, जब तक सभी लोग सही तरीके से बटन दबाना सीख गए।
एक दिशा में करंट भेजने में पाया गया कि लोग 10 गुना जल्दी सीख गए। उसकी उल्टी दिशा में करंट भेजने से लोगों को सीखने में देर लगी। वैज्ञानिक प्रो. जोहानसन बर्ग ने बताया कि यह टोपी दिमाग की मांसपेशियों को नियंत्रित करती है।
इसलिए इसका प्रयोग केवल ऐसे काम सीखने के लिए किया जा सकता है जिनमें दिमाग की मांसपेशियों का प्रयोग हो। जैसे नाव चलाना या पियानो बजाना। बर्ग ने कहा कि एजुकेशनल और स्पोर्ट्स ट्रेनिंग के अलावा यह चिकित्सा क्षेत्र में भी काम आएगी।
स्ट्रोक के बाद आने वाली परेशानियों, जैसे अंधेपन और भाषा समझने में दिक्कत का हल भी मिल सकता है। टोपी का असर उसे उतारने के आधे घंटे बाद तक रहता है। लेकिन बर्ग ने कहा कि रोजाना इस्तेमाल से इसका प्रभाव बढ़ाया जा सकता है।
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