दक्षिण भारतीय फिल्मों में बाल कलाकार के तौर पर अभिनय यात्रा की शुरुआत करने वाली रेखा ने 1970 में हिंदी फिल्मों में कदम रखा, तो पहली फिल्म सावन भादों में उनके जलवे चर्चा में आए, लेकिन उनकी शुरुआती फिल्मों से उनको पहचान नहीं मिली। शुरुआत में उन्हें सांवली और मोटी होने की वजह से
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काफी आलोचनों का सामना करना पड़ा मगर उन्होंने बखूबी से अपनी कमियों को दूर किया और फिल्मों में संघर्ष करने में कभी हार नहीं मानी|फिल्मी जगत में बुलंदिय़ों को छूने वाली रेखा क्य़ा राज्य़सभा में भी अपना लोहा मनवायेगीं या फिर कई अन्य फिल्मी स्टारस् की तरह आ के निकल जायेगी। फिर भी हम उम्मीद करते है कि वो बड़े पर्दे की तरह यहां भी अपनी मौजूदगी की गहरी छाप छोड़े।
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