3 दिनों के इस उपवास में अलग-अलग तमाम समुदाय के लोगों ने मोदी से मिलकर उन्हें अपने समुदाय की पगड़ी भेंट की...मोदी ने वे सभी पगड़ियां मंच पर ही पहनीं भी.. लेकिन, जब एक दरगाह
मोदी ने सारी पगड़ियां पहनीं लेकिन इमाम की टोपी पहनने से साफ इनकार कर दिया
के इमाम मंच पर मोदी से मिलने पहुंचे और उन्हें शॉल तथा टोपी पहनानी चाही, मोदी ने शॉल तो ओढ़ ली, लेकिन टोपी पहनने से इनकार कर दिया। इमाम का कहना है कि मोदी ने गुजराती में कहा कि 'मैं टोपी नहीं पहनता।'इमाम मुख्यमंत्री के इस व्यवहार से खासे निराश हुए। मीडिया से इमाम ने इसे अपना ही नहीं बल्कि सूफी परंपरा और धर्म गुरुओं का अपमान कहा है। उन्होंने कहा कि बतौर मुख्यमंत्री अगर वह मंच पर दूसरे तमाम समुदायों की भावनाओं का सम्मान करते हुए उनके निशान धारण कर सकते थे तो फिर हमारे निशान पर एतराज क्यों?
बीजेपी ने मोदी के रुख पर चुप्पी साध ली है। बीजेपी का अल्पसंख्यक चेहरा कहलाने वाले शाहवनाज हुसैन ने भी इस पर कोई कॉमेंट नहीं किया है।
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