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माओवादियों के शीर्ष नेता किशनजी की आज पश्चिम बंगाल में पश्चिमी मेदिनीपुर जिले के एक जंगल में संयुक्त बलों के साथ हुई मुठभेड़ में मौत हो गई। एक दिन पहले ही वह इस जगह से बचकर निकल गये थे।उग्रवाद निरोधी बल के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि 58 वर्षीय मोलाजुला कोटेश्वर राव की पहचान मुठभेड़ के बाद की गयी , जिन्हें किशनजी कहा जाता है।
तेलुगू भाषी किशनजी माओवादी पोलितब्यूरो के सदस्य थे और संगठन के तीसरे नंबर के ओहदेदार थे। वह वर्ष 2009 से जंगलमहल में सशस्त्र अभियान के प्रभारी थे।
सुरक्षा बलों को गुप्त सूचना मिली थी कि किशनजी अपने कुछ साथियों और एक अन्य मारे जा चुके माओवादी नेता की पत्नी सुचित्रा महतो, जिनके साथ वह रह रहे थे, के साथ कुशबनी जंगल में छिपे हुए हैं।
अधिकारी ने बताया कि इलाके को घेर लिया गया और मुठभेड़ हुई। किशनजी के चार स्तर के सुरक्षा घेरे को तोड़ दिया गया। किशनजी वर्ष 2009 से कुशबनी जंगल से अपनी गतिविधियां चला रहे थे।
जामबनी थाना क्षेत्र में बुरिसोल जंगल में आज मुठभेड़ शुरू हुई। यह इलाका झारखंड सीमा के पास कुशबनी से करीब है। अधिकारी ने कहा कि किशनजी की पहचान उनके पास मिली एके.47 राइफल से हुई। सुचित्रा और अन्य सहयोगी मौके से फरार हो गये।
संयुक्त बलों को इससे पहले पास के गोसाईंबांध गांव से एक लैपटॉप बैग, किशनजी तथा सुचित्रा के लिखे कुछ पत्र तथा कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त मिले।
केंद्रीय गृह सचिव आर के सिंह ने नयी दिल्ली में कहा कि किशनजी का मारा जाना नक्सलियों के लिए बड़ा झटका है क्योंकि वह भाकपा :माओवादी: के सांगठनिक ढांचे में तीसरे स्थान पर थे।
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