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| जार्डन के पायलट को जलाया...जार्डन ने दी फांसी |
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अम्मान: इस्लामिक स्टेट द्वारा अपने पायलट को जिंदा जलाने से गुस्साए जॉर्डन ने इस आतंकवादी संगठन से संबंध रखने वाले दो कैदियों को फांसी की सजा दे दी है। इन दो कैदियों में वह महिला आत्मघाती हमलावर साजिदा अल-रिशवी भी शामिल है, जिसे जॉर्डन ने अपने पायलट को छोड़ने के बदले रिहा करने की पेशकश की थी। हालांकि, पायलट के जीवित होने के संबंध में सबूत पेश न किए जाने की वजह से यह डील पूरी नहीं हो पाई थी।
इस्लामिक स्टेट ने बुधवार सुबह एक वीडियो जारी किया है, जिसमें जॉर्डन के पायलट मुआद अल कस्साबेह को जिंदा जलाते हुए दिखाया गया है। इस घटना से तिलमिलाई जॉर्डन सरकार ने चंद घंटों के अंदर 44 साल वर्षीय अल-रिशवी और जियाद कारबोली नाम के इन दोनों आतंकवादियों को स्वाका जेल भेजा और उन्हें फांसी दे दी गई। इराकी नागरिक अल-रिशवी 2005 में अम्मान के एक होटल में हुए धमाके के सिलसिले में गिरफ्तार हुई थी। तब इस महिला का सुसाइड बेल्ट समय पर नहीं खुल पाया था। उसने भागने की कोशिश की थी, लेकिन सुरक्षा बलों ने उसे तत्काल गिरफ्तार कर लिया था। शुरुआत में उसने अपना जुर्म कुबूल किया, लेकिन बाद में वह पलट गई। हालांकि, कोर्ट ने उसकी अपील को खारिज कर दिया था। फांसी की सजा पाने वाला दूसरा कैदी जियाद कारबोली अल कायदा का आतंकवादी है, जो जॉर्डन पर हमले की साजिश रचने का दोषी पाया गया था। इराक से संबंध रखने वाले इस आतंकवादी पर 2008 में जॉर्डन के एक व्यक्ति की हत्या करने का आरोप भी सिद्ध हुआ था। इससे पहले जॉर्डन की सेना के प्रवक्ता कर्नल ममदोह ने टेलीविजन पर दिए एक स्टेटमेंट में कहा था कि जिस तरह की त्रासदी हमारे देश पर आई है, उसका बदला भी ठीक वैसा ही होगा।
कौन था मुआद अल कस्साबेह?
मुआद अल कस्साबेह रॉयल जॉर्डेनियन एयरफोर्स का पहला लेफ्टिनेंट था। उसने एयरफोर्स में छह साल सेवाएं दी। बंधक बनाए जाने से पहले वह जिस F-16 फाइटर जेट को उड़ा रहा था, वो तकनीकी खामी के चलते सीरियाई शहर रक्का के आसपास क्रैश हो गया। तब आईएसआईएस आतंकियों का दावा था कि विमान उसने मार गिराया। आतंकियों ने उसे 24 दिसंबर से बंधक बनाया हुआ था। कस्साबेह अपने मां-बाप की सात संतानों में से एक था। उसकी उम्र महज 26 साल थी। वह जॉर्डन के करक का रहने वाला था। उसके चाचा रॉयल जॉर्डेनियन आर्मी में मेजर जनरल थे। कस्साबेह ने 2009 में किंग हुसैन एयर कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री ली थी।
इस्लामिक स्टेट ने बुधवार सुबह एक वीडियो जारी किया है, जिसमें जॉर्डन के पायलट मुआद अल कस्साबेह को जिंदा जलाते हुए दिखाया गया है। इस घटना से तिलमिलाई जॉर्डन सरकार ने चंद घंटों के अंदर 44 साल वर्षीय अल-रिशवी और जियाद कारबोली नाम के इन दोनों आतंकवादियों को स्वाका जेल भेजा और उन्हें फांसी दे दी गई। इराकी नागरिक अल-रिशवी 2005 में अम्मान के एक होटल में हुए धमाके के सिलसिले में गिरफ्तार हुई थी। तब इस महिला का सुसाइड बेल्ट समय पर नहीं खुल पाया था। उसने भागने की कोशिश की थी, लेकिन सुरक्षा बलों ने उसे तत्काल गिरफ्तार कर लिया था। शुरुआत में उसने अपना जुर्म कुबूल किया, लेकिन बाद में वह पलट गई। हालांकि, कोर्ट ने उसकी अपील को खारिज कर दिया था। फांसी की सजा पाने वाला दूसरा कैदी जियाद कारबोली अल कायदा का आतंकवादी है, जो जॉर्डन पर हमले की साजिश रचने का दोषी पाया गया था। इराक से संबंध रखने वाले इस आतंकवादी पर 2008 में जॉर्डन के एक व्यक्ति की हत्या करने का आरोप भी सिद्ध हुआ था। इससे पहले जॉर्डन की सेना के प्रवक्ता कर्नल ममदोह ने टेलीविजन पर दिए एक स्टेटमेंट में कहा था कि जिस तरह की त्रासदी हमारे देश पर आई है, उसका बदला भी ठीक वैसा ही होगा।
कौन था मुआद अल कस्साबेह?
मुआद अल कस्साबेह रॉयल जॉर्डेनियन एयरफोर्स का पहला लेफ्टिनेंट था। उसने एयरफोर्स में छह साल सेवाएं दी। बंधक बनाए जाने से पहले वह जिस F-16 फाइटर जेट को उड़ा रहा था, वो तकनीकी खामी के चलते सीरियाई शहर रक्का के आसपास क्रैश हो गया। तब आईएसआईएस आतंकियों का दावा था कि विमान उसने मार गिराया। आतंकियों ने उसे 24 दिसंबर से बंधक बनाया हुआ था। कस्साबेह अपने मां-बाप की सात संतानों में से एक था। उसकी उम्र महज 26 साल थी। वह जॉर्डन के करक का रहने वाला था। उसके चाचा रॉयल जॉर्डेनियन आर्मी में मेजर जनरल थे। कस्साबेह ने 2009 में किंग हुसैन एयर कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री ली थी।

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